معرفی اجمالی استان خراسان جنوبی
استان خراسان جنوبی، شرقی ترین استان ایران، دارای 150800کیلومتر مربع مساحت می باشد.
این استان بین 57درجه و 1 دقیقه تا 60 درجه و 57 دقیقه طول شرقی و 30 درجه و 31 دقیقه تا 34 درجه و 36 دقیقه عرض شمالی قرار گرفته و9.2% از مساحت کشور را به خود اختصاص داده است.
استان خراسان جنوبی با 768898 نفر جمعیت (سرشماری سال 95) دارای تراکم نسبی بالغ بر1/5 نفردرکیلومتر مربع است که به تناسب وسعت استان نشانگر کمترین تراکم در کشور است . (جدول شماره یک ) براساس آخرین تقسیمات کشوری، خراسان جنوبی دارای 11 شهرستان (بیرجند ، بشرویه ، قائنات ، فردوس، درمیان ، سرایان ، سربیشه ، نهبندان ، زیرکوه ، خوسف و طبس ) 28 شهر ، 25 بخش ، 61 دهستان و 3556 آبادی میباشد . (جدول شماره دو ) استان از نظر ناهمواریها به دو قسمت «کوهستانی و مرتفع» و «پست و هموار» تقسیم می شود.
بلندترین قله های استان «کمرسرخ» به ارتفاع 2842 متر در شمال (شهرستان قائنات، بخش نیمبلوک)،«مؤمن آباد» به ارتفاع 2771 متر در مرکز (شهرستان بیرجند)و «شاهکوه» به ارتفاع 2737 متر درجنوب (شهرستان نهبندان) می باشند.
مناطق پست و هموار استان شامل زمینها و دشتهای همواری هستند که در قسمتهای مرکزی،شمال غربی، غربی و جنوب غربی استان قرار گرفته اند. این دشتها در نقاط حاصلخیز شمال،شمال غرب و مرکز استان قرار گرفته و از نظر کشاورزی، دامپروری و احداث راههای ارتباطیاز اهمیت خاصی برخوردارند. دشتهای جنوب، شمال غرب (بشرویه) و جنوب غربی استان
حاوی نمکزارها و نقاط پست و کم ارتفاعی هستند که گاهاً از هر نوع پوشش گیاهی عاری هستند و بدلیل مجاورت با حاشیه شرقی کویر نمک (شهرستان فردوس) و حاشیه شمال کویر لوت (شهرستان نهبندان)، آب و هوایی خشک و خشن داشته و در معرض حمله شنهای روان قرار دارند.به علت کمی نزولات جوی، فصلهای پرباران منتهی به ماههای پایانی زمستان و اوایل بهار می باشد.
اقلیم استان از نوع خشک و بیابانی است. متوسط بارندگی سالیانه استان به 133 میلیمتر می رسد که اغلب به صورت بارشهای رگباری و غیر متناوب است. حداکثر درجه حرارت مطلق استان 48درجه سانتیگراد در بشرویه ثبت شده و پایین ترین دمای مشاهده شده 23ـ درجه سانتی گراد در قاین بوده است.در استان دوره گرما طولانی است و از اواخر اردیبهشت تا
اواخر شهریور را در بر می گیرد. ماههای سرد سال شامل آذر، دی، بهمن، تا اواسط اسفند می باشند .
از نظر کشاورزی در سال 95 استان دارای 154710.09هکتار اراضی زراعی و باغی زیر کشت آبی و دیم برای محصولات زراعی با سطح 77307.26هکتار با تولید 483513.68 تن و اراضی باغی 77402.83 هکتار و با تولید 114443 تن می باشد.
از مهمترین محصولات آن می توان به زرشک، زعفران،عناب، پنبه و گل نرگس اشاره نمود.
عمده ترین گیاهان دارویی
شامل آنغوزه، شیرین بیان، وشاء، آویشن، خاکشیر، زیره سبز، کلپوره، درمنه، بومادران، بابونه، کما، آلوورا، سماق، نعنا فلفلی و نعنای محلی، به لیمو، اسطخودوس، رزماری، کتیرا، بادام کوهی، هزار خار، سیاه گینه، چرخه، عجوه، جوبک هراتی، باریجه، بنه، ورک، ارمک، قدومه، جعده، گرگ تیغ، چلیپای بیابانی، قلیانک و اسفند رومی می باشد.
منابع آبی استان شامل3299 حلقه چاه،2189 رشته چشمه و 6252 رشته قنات با تخلیه سالانه 01/1123 میلیون متر مکعب می باشد.
مزایا و قابلیت های بخش کشاورزی استان
1- استقرار استان در مسیر شمال– جنوب و شرق– غرب و تأثیر آن در تمامی ابعاد توسعه بویژه کشاورزی
2- وجود مزیت های نسبی برخی تولیدات کشاورزی به ویژه رتبه اول در تولید زرشک و عناب، رتبه دوم در تولید زعفران، رتبه پنجم درتولید گل نرگس و محصولات دامی مثل وجود چرخه کامل تولید گوشت مرغ ، ذخایر غنی ژنتیکی دامی
3- امکان استفاده از دشت ها و حاشیه کویر در پرورش دام نظیر شتر(حدود 15 درصد جمعیت شترکشور) و گوسفند بلوچی با تولید پشم بسیار مرغوب و بز کرکی با تولید کرک با ارزش اقتصادی بالا و برخی محصولات کشاورزی سازگار
4- برخورداری از دانش بومی و سنتی در استفاده بهینه از منابع آب و خاک و اختصاص مقام اول کشوری در تعداد قنوات
5- امکان تشکیل و راه اندازی شرکت های سهامی زراعی و مراکز آموزش کشاورزی و مرکزتحقیقات کشاورزی و منابع طبیعی به منظور پرورش نیروی انسانی متخصص و اجرای طرح های تحقیقاتی مناطق خشک و بیابانی
-اولویت های سرمایه گذاری در بخش کشاورزی
1ـ احداث مجتمع های تولید گیاهان داروئی
2ـ ایجاد باغ ها و مزارع مکانیزه کشت زرشک و زعفران
3ـ ایجاد مجتمع های بزرگ گلخانه ای و تولید انواع صیفی جات، قارچ صدفی، سبزیجات و 000
4ـ احداث کشتارگاه های صنعتی دام و طیور و صنایع جانبی (کنسروسازی)
5ـ احداث مجتمع های تولید مرغ و تخم مرغ و مرغِ مادر
6ـ پرورش ماهیان گرم آبی و سردآبی در منابع آبی موجود
7ـ احداث دامداری های صنعتی
8- ایجاد و فعال سازی کارخانجات تولید کنسانتره
9- فعال نمودن واحدهای تولید مواد لبنی استان
10- ایجاد واحدهای بسته بندی خشکبار با تاکید بر تولیدات استان شامل زرشک
، عناب ، پسته ، بادام ، خرما و نظایر آن
11- ایجاد واحدهای فرآوری تولیدات در حال گسترش زیتون
12- واحدهای صنعتی مرتبط با کود آلی و زیستی با تاکید بر استفاده از مواد اولیه موجود در استان
فواصل محورهای حوزه استحفاظی اداره کل راه و ترابری خراسان جنوبی
|
نام محور |
فاصله (کیلومتر) |
نام محور |
فاصله (کیلومتر) |
|
بیرجند-خوسف |
35 |
قاین - سده |
45 |
|
بیرجند- خور |
85 |
فردوس-بشرویه |
102 |
|
بیرجند-سده |
55 |
فردوس-سرایان |
38 |
|
بیرجند- قاین |
102 |
فردوس- اسدیه |
238 |
|
بیرجند- سرایان |
162 |
فردوس- سده |
142 |
|
بیرجند- فردوس |
195 |
فردوس- سربیشه |
263 |
|
بیرجند- بشرویه |
285 |
فردوس- نهبندان |
397 |
|
بیرجند- اسدیه |
90 |
نهبندان –اسدیه |
187 |
|
بیرجند- سربیشه |
65 |
نهبندان –سرایان |
359 |
|
بیرجند- نهبندان |
195 |
نهبندان –بشرویه |
499 |
|
بیرجند- کرمان |
560 |
نهبندان –فردوس |
397 |
|
بیرجند- دیهوک |
195 |
نهبندان –سربیشه |
134 |
|
بیرجند- طبس گلشن |
270 |
سربیشه –خوسف |
101 |
|
بیرجند- یزد |
637 |
سربیشه –اسدیه |
53 |
|
بیرجند- شیراز |
1067 |
سربیشه- سرایان |
225 |
|
بیرجند- تهران |
1125 |
سربیشه –بشرویه |
365 |
|
بیرجند-گناباد |
208 |
بشرویه –اسدیه |
340 |
|
بیرجند- مشهد |
485 |
بشرویه –سرایان |
205 |
|
بیرجند- زابل |
345 |
اسدیه –سرایان |
200 |
|
بیرجند- زاهدان |
451 |
قاین –گناباد |
106 |
|
قاین - فردوس |
157 |
قاین –مشهد |
385 |
|
قاین - سرایان |
119 |
نهبندان –زابل |
173 |
|
قاین - بشرویه |
259 |
نهبندان –زاهدان |
260 |
|
قاین - اسدیه |
144 |
خوسف –کرمان |
525 |
|
قاین - سربیشه |
176 |
خوسف –دیهوک |
160 |
|
قاین - نهبندان |
303 |
خوسف –طبس گلشن |
235 |
|
قاین - سده |
45 |
فردوس-سرایان |
38 |
|
منبع : راهنمای گردشگری مسافرین نوروزی اداره کل میراث فرهنگی ، صنایع دستی و گردشگری استان خراسان جنوبی |
|||
|
آخرین تقسیمات کشوری استان خراسان جنوبی بر اساس سرشماری سال 90 و اصلاحات بعدی |
||||||
|
خالی از سکنه |
دارای سکنه |
تعداد ابادی |
نام دهستان |
نام بخش |
شهر |
شهرستان |
|
11 |
61 |
72 |
القورات |
مرکزی |
بیرجند |
بیرجند |
|
81 |
167 |
248 |
باقران |
|||
|
0 |
13 |
13 |
شاخن |
|||
|
2 |
13 |
15 |
شاخنات |
|||
|
6 |
27 |
33 |
فشارود |
|||
|
4 |
44 |
48 |
کاهشنگ |
|||
|
104 |
325 |
429 |
6 |
1 |
جمع |
|
|
22 |
46 |
68 |
براکوه |
جلگه ماژان |
خوسف |
خوسف |
|
23 |
67 |
90 |
جلگه ماژان |
|||
|
9 |
49 |
58 |
قلعه زری |
|||
|
7 |
36 |
43 |
خوسف |
مرکزی |
محمد شهر |
|
|
9 |
19 |
28 |
خور |
|||
|
70 |
217 |
287 |
5 |
2 |
جمع |
|
|
22 |
44 |
66 |
درمیان |
مرکزی |
اسدیه |
درمیان |
|
3 |
19 |
22 |
میاندشت |
|||
|
0 |
23 |
23 |
فخرود |
قهستان |
||
|
5 |
36 |
41 |
قهستان |
قهستان |
||
|
6 |
22 |
28 |
طبس مسینا |
گزیک |
طبس مسینا |
|
|
3 |
13 |
16 |
گزیک |
گزیک |
||
|
39 |
157 |
196 |
6 |
3 |
جمع |
|
|
16 |
32 |
48 |
غیناب |
مرکزی |
سربیشه |
سربیشه |
|
24 |
65 |
89 |
مومن آباد |
|||
|
3 |
40 |
43 |
مود |
مود |
||
|
26 |
54 |
80 |
نهارجان |
مود |
||
|
18 |
40 |
58 |
درح |
درح |
||
|
6 |
29 |
35 |
لانو |
|||
|
93 |
260 |
353 |
6 |
3 |
جمع |
|
|
2 |
10 |
12 |
پترکان |
زیرکوه |
حاجی آباد |
زیرکوه |
|
1 |
35 |
36 |
زیرکوه |
|||
|
1 |
8 |
9 |
شاسکوه |
شاسکوه |
||
|
* |
8 |
8 |
بهناباد |
زهان |
||
|
4 |
24 |
28 |
افین |
زهان |
||
|
0 |
16 |
16 |
زهان |
|||
|
8 |
101 |
109 |
6 |
3 |
جمع |
|
|
0 |
6 |
6 |
پشتکوه |
مرکزی |
قاین |
قاین |
|
8 |
60 |
68 |
قاین |
|||
|
18 |
19 |
37 |
مهیار |
نیمبلوک |
||
|
8 |
7 |
15 |
کرغند |
نیمبلوک |
||
|
25 |
26 |
51 |
نیمبلوک |
اسفدن |
||
|
1 |
14 |
15 |
آفریز |
سده |
آرین شهر |
|
|
1 |
18 |
19 |
پسکوه |
خضری دشت بیاض |
||
|
17 |
19 |
36 |
سده |
|||
|
78 |
169 |
247 |
8 |
3 |
جمع |
|
|
24 |
5 |
29 |
پیر حاجات |
مرکزی |
طبس |
طبس |
|
19 |
21 |
40 |
گلشن |
|||
|
51 |
31 |
82 |
منظریه |
|||
|
16 |
5 |
21 |
نخلستان |
|||
|
53 |
55 |
108 |
دستگردان |
دستگردان |
عشق آباد |
|
|
77 |
23 |
100 |
کوه یخاب |
|||
|
34 |
22 |
56 |
دیهوک |
دیهوک |
دیهوک |
|
|
39 |
18 |
57 |
کویر |
|||
|
313 |
180 |
493 |
8 |
3 |
جمع |
|
|
30 |
51 |
81 |
بندان |
مرکزی |
نهبندان |
نهبندان |
|
47 |
49 |
96 |
میغان |
|||
|
81 |
45 |
126 |
نه |
|||
|
56 |
69 |
125 |
شوسف |
شوسف |
شوسف |
|
|
23 |
84 |
107 |
عربخانه |
|||
|
237 |
298 |
535 |
5 |
2 |
جمع |
|
|
44 |
14 |
58 |
باغستان |
مرکزی |
فردوس |
فردوس |
|
28 |
13 |
41 |
برون |
|||
|
125 |
17 |
142 |
حومه |
اسلامیه |
||
|
197 |
44 |
241 |
3 |
1 |
جمع |
|
|
191 |
36 |
227 |
علی جمال |
مرکزی |
بشرویه |
بشرویه |
|
16 |
15 |
31 |
کرند |
|||
|
46 |
14 |
60 |
ارسک |
ارسک |
ارسک |
|
|
17 |
18 |
35 |
رقه |
|||
|
270 |
83 |
353 |
4 |
2 |
جمع |
|
|
147 |
14 |
161 |
آیسک |
آیسک |
سرایان |
سرایان |
|
18 |
12 |
30 |
مصعبی |
ایسک |
||
|
61 |
10 |
71 |
سه قلعه |
سه قلعه |
سه قلعه |
|
|
38 |
13 |
51 |
دوکوهه |
|||
|
264 |
49 |
313 |
4 |
2 |
28 |
جمع |
|
1673 |
1883 |
3556 |
61 |
25 |
28 |
جمع کل استان |
جدول وسعت و جمعیت استان خراسان جنوبی به تفکیک شهرستان
|
شهرستان |
وسعت(کیلومتر مربع) |
درصد |
جمعیت(سرشماری 95) |
درصد |
|
بیرجند |
4004 |
2.7 |
261324 |
33.98
|
|
خوسف |
16029 |
10.6 |
27600 |
3.58
|
|
درمیان |
5797 |
3.8 |
53714 |
6.98
|
|
سرایان |
9342 |
6.2 |
33312 |
4.33
|
|
سربیشه |
8199 |
5.4 |
40959 |
5.32
|
|
قاین |
7601 |
5 |
116181 |
15.11
|
|
زیرکوه |
8226 |
5.5 |
40155 |
5.22
|
|
نهبندان |
26094 |
17.2 |
51449 |
6.69
|
|
فردوس |
4103 |
2.7 |
45523 |
5.92
|
|
بشرویه |
5993 |
4 |
26064 |
3.38
|
|
طبس |
55412 |
36.9 |
72617 |
9.44
|
|
استان |
150800 |
100 |
768898 |
100.00
|
صنعت
کارخانهها و کارگاههای تولید ماشینآلات و تجهیزات، وسایل نقلیهٔ موتوری، محصولات فلزی، تجهیزات حمل و نقل، اکسید منیزیم، محصولات لاستیکی و پلاستیک، ماشینآلات و دستگاههای برقی، محصولات کانی غیرفلزی، کاغذ و محصولات کاغذی، ابزار پزشکی و اپتیکی، ساعت، رادیو و تلویزیون، فلزات اساسی، چوب و محصولات چوبی، منسوجات، مبلمان و صنایع غذایی و آشامیدنی در سطح استان و نیز در ۵ شهرک صنعتی در بیرجند، فردوس، قاین، نهبندان و سربیشه مشغول فعالیت میباشند.
قالیبافی، سفالگری، رنگرزی، آهنگری، مسگری، حصیربافی، سبدبافی، نمدمالی، زیلوبافی،پارچه بافی، نوغان داری، ریسندگی، گلیم بافی، جاجیم بافی، زرگری، دباغی و سوزندوزی، از جمله صنایع دستی استان خراسان جنوبی هستند.
معدن
این استان دارای پتانسیل بالایی در بخش معادن میباشد به طوری که دارای تنها ذخایر منیزیت ایران (شهرستان بیرجند و شهرستان سربیشه، بزرگترین ذخیره و تنها معدن آزبست ایران (معدن حاجات نهبندان) بوده و ذخایر و معادن مهم بنتونیت (شهرستان فردوس، سه قلعه)، گرانیت (بیرجند و سربیشه)، گل سفید (بیرجند) ، بازالت (شهرستان سربیشه) در خراسان جنوبی مورد بهرهبرداری قرار میگیرد. یکی دیگر از مهمترین معادن این استان، معدن مس قلعه زری واقع در جنوب غرب این استان (خوسف) است که به علت عیار طلای بالای آن در سطح جهان شناخته شده است. معادن ولاستونیت، کائولن، تراورتن، فلدسپات، بوکسیت، مارن، گچ، آهک، دولومیت،مرمریت، خاک صنعتی، سنگ لاشه و توف از دیگر معادنی هستند که در این استان در حال بهرهبرداری هستند.
جاذبههای گردشگری
استان خراسان جنوبی، در مسیر محورهای ارتباطی استانهای جنوبی ایران با مشهد قرار دارد.
محور اصلی ارتباطی استانهای یزد، کرمان، اصفهان، فارس، بوشهر و هرمزگان به مشهد، از فردوس میگذرد. همچنین محور ارتباطی استان سیستان و بلوچستان به مشهد از شهرهای نهبندان، سربیشه، بیرجند و قائن عبور میکند.
آبگرم معدنی فردوس، یک چشمه آبگرم با خواص درمانی است که در فاصله حدود ۲۰ کیلومتری شمال شهر فردوس واقع شدهاست.
این آبگرم طبیعی، به دلیل داشتن خواص درمانی، هر ساله پذیرای شمار زیادی از گردشگران داخلی و خارجی است. منطقهٔ گردشگری باغستان و آبگرم، تنها در ۱۵ روز نخست تیرماه ۱۳۸۸، با جذب ۲۷۶ هزار نفر بازدید کننده، بیشترین میزان ورودی مسافر در این مدت را در استان خراسان جنوبی داشتهاست. استفاده از آبگرم معدنی فردوس در درمان بسیاری از بیماریهای پوستی و مفصلی مؤثر بوده و توسط بسیاری از پزشکان توصیه گردیدهاست.
پس از زمینلرزهٔ سال ۱۳۴۷، آب این چشمهٔ آبگرم کاملاً خشکید، ولی بعد از دو سال خود به خود شروع به جوشیدن نموده و جاری شد.
2-آرامگاه ابن حسام خوسفی
آرامگاه ابن حسام خوسفی، شاعر سده نهم هجری ، در شهر خوسف استان خراسان جنوبی واقع شدهاست. این آرامگاه که قدمت آن به بیش از ۵۰۰ سال میرسد، در سال ۹۲۰ هجری قمری ساخته و در قرن ۱۳ قمری بازسازی گردید.
بنا دارای نقشه چلیپایی شکل و پوشش گنبدی است و در سه جهت ، سه طاق نما با قوس جناقی دارد.
همچنین در داخل آرامگاه کتیبهای کاشیکاری شده به رنگ سفید حاوی اشعار ابن حسام است که دور مقبره را فرا گرفتهاست
3-باغستان علیا
روستای باغستان علیا، مرکز دهستان باغستان، از توابع بخش مرکزی شهرستان فردوس بوده و در فاصله ۱۵ کیلومتری شمال شرقی شهر فردوس واقع شدهاست. که جمعیت این روستا، 5666 نفر بوده است روستای باغستان علیا، دارای آب و هوایی مطلوب و مناظر طبیعی زیبا میباشد که آن را به یکی از مناطق ییلاقی و گردشگری شهرستان فردوس تبدیل کرده بهگونهای که این روستا به عنوان منطقهٔ نمونهٔ گردشگری تصویب شدهاست منطقهٔ گردشگری باغستان و آبگرم، تنها در ۱۵ روز نخست تیرماه ۱۳۸۸، با جذب ۲۷۶ هزار نفر بازدید کننده، بیشترین میزان ورودی مسافر در این مدت را در استان خراسان جنوبی داشتهاست
جاده فردوس به گناباد از وسط این روستا عبور میکند که در دو طرف جاده، درختان بید، چنار و سپیدار سر به فلک کشیده جلوه خاصی به آن داده و تمام مسیر را سایه میکنند. همچنین آب قنات تاریخی بلده از دو طرف جاده عبور میکند. در مسیر آب این قنات، بیش از ۲۰ آسیاب آبی قرار داشته که تعدادی از آنها، از جمله آسیاب تاریخی معروف به آسیاب آبی حاجی خان هنوز هم باقی ماندهاند.محصول انار باغستان، مرغوبترین انار منطقهٔ فردوس میباشد
4-بند دره، واقع در ۵ کیلومتری انتهای خیابان مدرس بیرجند در میان رشته کوه جنوب این شهر به نام رشته کوه باقران واقع است.
این بند ، بزرگترین بند کوهستانی شهر بیرجند است که به دستور امیر شوکتالملک در سال ۱۲۹۴ هجری قمری ساخته شدهاست.
بند دره از سنگ ، آجر و ملات ساروج ساخته شدهاست که طول تاج آن ۳۱ متر، عرض تاج آن ۳ تا ۵ متر و ارتفاع آن حدود ۱۳ متر است.
راه ارتباطی آن از بیرجند، از طریق خیابان پاسداران امکان پذیر است.
5- چِنِشت، یکی از روستاهای دهستان نهارجان بخش مود شهرستان سربیشه در استان خراسان جنوبی است.
این روستا به علت جاذبههای طبیعی، تاریخی و فرهنگی به عنوان یکی از روستاهای هدف گردشگری در استان خراسان جنوبی شناخته میشود.
چنشت در میان رشته کوه باقران قرار گرفته و فاصله آن تا بیرجند، مرکز استان خراسان جنوبی، ۶۰ کیلومتر است.
6-خُراشادروستایی است واقع در ۲۴ کیلومتری جنوب شرقی بیرجند و واقع در استان خراسان جنوبی. این روستا به سبب نخبه پرور و عالم خیز بودن ، صنایع دستی [۲] و نیز زیبایی طبیعی آن شهرت دارد.[۳]
در لغتنامه دهخدا در سال ۱۳۴۵ در مورد خراشاد چنین نوشته شدهاست:
قریهای است از بخش حومه شهرستان بیرجند ، واقع در سی هزار گزی جنوب بیرجند. این ناحیه کوهستانی با آب و هوای معتدل و ۹۲۸ تن سکنه فارسی زبان است. آب آن از قنات و محصولاتش غلات ، زعفران و سردرختی است. اهالی به کشاورزی و قالی بافی گذران میکنند و راه آن اتومبیل رو است. مزرعه گنج آباد و میرزاملک و علی آباد و سالم آباد جزء آن است.
در درهٔ خراشاد روستاهای گنجآباد، سالم آباد، علی آباد و میرزاملک، نصرآباد، ملک آباد، کفکی و برزج واقع شدهاند.
7-باغ شوکتآباددر ۵ کیلومتری شرق بیرجند، در روستای شوکتآباد و در مسیر جاده بیرجند-زاهدان واقع شدهاست. در مقابل این باغ دانشگاه بیرجند قرار دارد.
8-غارخونیکدر شمال شرق روستای خونیک بر ارتفاعات مشرف به روستا در ۲۰ کیلومتری جنوب قاین قرار دارد. ابزار سنگی به دست آمده از این غار مربوط به دوران موسترین یا پارینه سنگی میانهاست که تقریباً سی هزار سال قدمت دارند.آثار زندگی در غار خونیک از دوران پارینه سنگی تا عصر اسلامی باقی مانده. این آثار از طبقات زیرو رو شده غار در اثر زلزله به دست آمده که موید نظریه قدمت این غار میباشد. غار خونیک دارای دهانهای در حدود ۲ متر وفضای داخلی به طول۵/۱ و عرض ۳ متر میباشد. دیوارههای آن از سنگهای توروس تشکیل شدهاند که به زیبا یی ویژهای به محیط داخلی ان دادهاند.اولین گمانه زنیهای باستان شناسی در این غاربه سال ۱۹۴۹ میلادی توسط پروفسور کالتون استانلی کوون انجام شد. ابزار به دست آمده از غار خونیک عبارت بود از انواع تیغههای سنگی که به وسیله انسانهای عصر پارینه سنگی میانه تراشیده شده بودند و به ابزار یافت شدهٔ موسترین در فلات ایران شباهت کامل داشتند. (شماره ثبت آثار ملی:۹۵۹۲)
از دیگر غارهای جالب توجه منطقه قائنات میتوان به غار جوجه، غار فارسان، ترشو، نوغاب و غار پهلوان اشاره کرد.
9-ارگ فورگارگی است در روستای فورگ از توابع شهرستان درمیان در استان خراسان جنوبی ایران.
10- روستای ماخونیکیکی از هفت روستای شگفتانگیز جهان میباشد و به لحاظ شهرت آن به شهر «لیلیپوتها»، جذابیتهای حیرتانگیزی دارد. این روستا در فاصله ۷۸ کیلومتری شرقی شهر سربیشه در مسیر جاده سربیشه به روستای دُرُح قرار دارد.
منطقه ماخونیک متشکل از ۱۲ آبادی است که روستای ماخونیک بزرگترین آنها محسوب میشود. این روستا شامل ماخونیک Maxonic، کفازKefaz، چاپنسر Japansar، توتک Tutak، سفال بند Sefalband، سولابست Sulabest، لجونگ (سفلی و علیا) lejong، کلاته بلوچ Kelate baluj، دامدامه Damdameو میش نو Misnow، خارستو Xayestuو جلارو Jelaroاست.
اهالی این روستاها از نظر مذهب، معیشت، شیوه زندگی و اوضاع اجتماعی با یکدیگر وجه اشتراک زیادی دارند اما غالب این روستاها اصل و نسب خود را از روستای ماخونیک میدانند.
10-مدرسه شوکتیهیا مدرسه شوکتی یکی از بناهای تاریخی شهر بیرجند در استان خراسان جنوبی است که سومین مدرسه ایرانی به شیوه جدید و پس از مکتبخانههای سنتی است.
ساختمان مدرسه شوکتیه از محل موقوفات امیر اسماعیل خان معروف به شوکت الملک اول توسط محمد ابراهیم خان علم (شوکت الملک دوم)، پدر اسدالله علم، در سال ۱۳۰۸ه.ق بهدست استادان و معماران یزدی شروع و در سال ۱۳۱۲ه.ق بنای آن بهپایان رسید
در شهریور ماه ۱۳۸۲ همایشی به مناسبت یکصدمین سالگرد تاسیس مدرسه شوکتیه در دانشگاه بیرجند برگزار گردید.
11-مدرسهٔ علمیه علیا، مدرسهای است مربوط به دورهٔ صفویه، واقع در شهر تاریخی تون (فردوس امروزی).
این مدرسه که دارای ساختار چهار ایوانی و پلان هشتضلعی است، در دورهٔ صفویه و به دست فردی به نام «میر علی بیک» ساخته شدهاست
مدرسهٔ علیا، تا پیش از زمینلرزهٔ سال ۱۳۴۷، مورد استفاده طلاب و مدرسین علوم دینی بودهاست، ولی امروزه به عنوان آثار تاریخی توسط سازمان میراث فرهنگی نگهداری میشود. از مشخصات بارز معماری این مدرسه، تکرار فرم هشت ضلعی در قسمتهای مختلف پلان آن است.
12-مسجد جامع تون، که امروزه بیشتر مسجد جامع قدیم نامیده میشود، از جمله نقاط دیدنی شهر فردوس میباشد که در محوطهٔ باستانی تون در جنوب غربی این شهر قرار دارد.
مسجد جامع تون متعلق به دوره سلجوقیان بودهاست و نخستین باری که از آن در کتب تاریخی یاد شده، در احسنالتقاسم مقدسی متعلق به نیمهٔ دوم سده چهارم هجری است.[۱]
مسجدی که امروزه به یادگار مانده، از مساجد دو ایوانی سبک خراسانی است که ایوان شرقی و پایاب مسجد در زلزلهای مهیب در اوایل دوره صفویه فرو ریخته و به جز ایوان قبله و گنبدخانههای طرفین آن، سه ضلع دیگر در دوره صفوی با کمی عقبنشینی از هر ضلع، مجدداً بازسازی شدهاند.
معماری و تزئینات آجرنمای ایوان غربی این بنا مربوط به قرن پنجم و ششم هجری قمری و دوره سلجوقی است و در جبهه شرقی آن، در اوایل دورهٔ قاجار شبستانی به نام شبستان آخوند ملااکبر احداث شدهاست.[۲] این شبستان دارای صد ستون قطور بوده که در زمینلرزهٔ سال ۱۳۴۷ به کلی تخریب شد. این مسجد با شمارهٔ ۱۲۲۲ در فهرست آثار ملی کشور ثبت شدهاست.
ایوان این مسجد ۱۶ متر ارتفاع دارد و پوشش آن طاق و تویزه است که ویژگی سبک معماری خراسانی است. آجرنمای تزئینی این ایوان، تکرار یک شکل هندسی در قالبهای ۶۰ در ۶۰ سانتیمتر است. در فضاهای خالی این نمای آجری، قطعات کاشی جای داشته که امروزه به جز ۳ یا ۴ قطعه آن هم به طور غیر منظم، هیچ نشانی از کاشیها دیده نمیشود. همچنین در نمای پوشش داخلی ایوان، آثاری از نقاشی بر روی گچ دیده میشود.[۴]
13-مصعبی، روستایی است از توابع بخش مرکزی شهرستان سرایان در استان خراسان جنوبی ایران.این روستا، مرکز دهستان مصعبی بوده که جمعیت آن 2453 نفر بودهاست
این روستا تا شهر سرایان ۳۰ کیلومتر و تا شهر فردوس ۴۵ کیلومتر فاصله دارد. آنچه این روستا را از سایر روستاهای استان خراسان جنوبی متمایز میسازد وجود آب و هوای مناسب در فصول گرم سال میباشد به گونهای که در ایام تعطیلات مهمترین مرکز تفریحی در منطقه به شمار میرود.این روستا در سال ۸۶ از سوی استانداری خراسان جنوبی به عنوان مرکز توریستی استان شناخته شد. علاوه بر جاذبههای طبیعی وجود مقبره امامزاده سلطان مصیب نیز بر رونق گردشگری در این روستا افزودهاست
شهرستان بیرجند
شهرستانبیرجند در شرق ایران وجنوب استان خراسان قراردارد.ارتفاع شهر بیرجند از سطح دریا1480متربوده و فاصله آن تا مشهد،زاهدان و تهران به ترتیب 1320،458،486کیلومتراست.از لحاظ وضعیت اقلیمی دو عنصر مهم یعنی کوههای بلند ودشتهای وسیع ازمهمترین عوامل تأثیر گذار در آب و هوای منطقه به شمار می روند.نزدیکی بهکویر مرکزی و وجود دشتهای وسیع،باعث بوجود آمدن آب و هوای بیابانی همراهباتابستانهای گرم شده است ازدیگر سو وجود کوههایی در امتداد شرقی-غربی باعثگردیده انداز شدت گرما کاسته ومنطقه نسبت به نقاط همجوار از اعتدال بیشتریبرخوردار گردد.متوسط بارندگی سالیانه 167 میلیمتر است بیشترین میزانبارندگی مربوط به فصول زمستان وبهار می باشد و در مجموع دره های واقعدررشته کوههای منطقه از جمله رشته کوه باقران جزومناطق ییلاقی و خوش آب وهوای شهرستان محسوب می شوند. فقدان رودخانه دائمی و کمی نزولات جوی باعثشده تا تعداد محصولات کشاورزی موجود شامل محصولاتی باشد که با آب کمترینیاز دارند زرشک وزعفران از جمله محصولاتی هستند که علاوه بر نیازکمتر بهآب کاملأ با شرایط اقلیمی منطقه منطبقمیباشند.علاوه بردومحصول یادشده محصولات دیگریچونٍ؛عناب،گندم،چغندرقند،پنبه،ارزن،عدسی،لوبیا،نخود،باقلا،انگور،خربزه و... به عمل میایند. آثاروبناهای تاریخی وگهن این سرزمین نشان از عظمت و دیرینگیفرهنگ وتمدن قوم ساکن در منطقه دارند.از لحاظ فرهنگ،علم ومعرفت این دیاریکی ازدرخشان ترین نقاط ایران به شمار میرود،به طوریکه وجود علمای فاضل وعرفای کامل در جای جای این خطه نشانگر این موضوع است.نام بیرجند خود یکی ازنامهای باستانی بونه و در معنی آن میتوان به موارد زیر که در کتب گوناگونآمده اشاره نمود؛در برخی کتب آن را" بر کند" نوشته اندو برخی ذکر نمو دهاند،چون بیژن بنیان اولیه آنرا نهاده نام آن بیژن بوده و با تکرارزیاد"بیژن" به"بیرجند" تبدیل شده است،آنچه مسلم است در فارسی باستان کلمهبیرجند مرکب از دو واژه بیر به معنی صاعقه وطوفان وجند یا کند به معنی شهردیه است. آثار تاریخی ونشانه های فرهنگی بجای مانده از ادوار گذشته در نقاطمختلف بیرجند به چشم می خورد تا آنجا که توجه هر تازه واردی را ناخودآگاهبه سوی خود جلب و جذب میکند. مطالعات باستان شناسی در بیرجند حاکیازاستقرار اقوام کهن پیش از تاریخ و دوره های متاخر در این حوزه دارد. تاریخ بیرجند با اساطیر کهن ایران باستان عجین شده وهرجا سخن از قهستانوبیرجند پیش می آید بلافاصله تداعی کننده نام سام بن نریمان می باشد،چرا کهاو را بنیان گذار اولیه این خطه میدانند.نامهای اساطیری وباستانی فراوانیدر منطقه یافت می شود که بر گرفته از اسطوره ها وتاریخ نیرین ایران زمیناست. نامهایی نظیر؛گیو،گل،چهکند،نوفرست،چاج،اسفزار،نوکند،فورگ و... از اینقبیل می باشند. سابقه حیات در حوزه طبیعی بیرجند بسیار طولانی تر از آن استکه تصورمیشود برای نمونه قدیمی ترین اثر حیات وزندگی در این حوزه مربوط بهرد پای حیوانات عظیم الجثه ما قبل تاریخ درشمال بیرجند است. به گفته محققانوپژوهشگران کانادایی این آثار متعلق به 50 سال قبل می باشد که نر نوع خودیکی از بهترین وکاملترین مجموعه از نمونه ردپاهای یافت شده ازابتدا تا کنونبه شمار میرود. علاوه بر آن برای اولین باردر این منطقه ردپای مربوط بهپرندگان مختلف گزارش شده است. اگر چه در آغازگمان می رفت سابقه سکونت درمنطقه مربوط به ادوار تاریخی باشد ولی آثار شناسایی شده نشان دهندهاستقراراقوامی در دوران پیش از تاریخ در منطقه دارد. بهترین اثر بجای ماندهاز این اقوام نگاره های موجود درسنگ نگاره لاخ مزارو محوطه هایداستانی متعددی است که در منطقه وجود دارد. ازدورانتاریخی نیز آثاری بدست آمده که حکایت ازحضور سلسله هاییچون؛هخامنشیان،اشکانیان وساسانیان دارد.کشف سنگ نگاره های لاخمزار درروستای کوچ از توابع بخش مرکزی بیرجند که مربوط به چند هزارسال قبل استمهرتائیدی بر سابقه استقرار بشروفرهنگ متعالی آنها دراین خطه می باشد. اینسنگ نگاره ها دارای تنوع وگوناگونی زیاد هستند. در اینجا برای نمونه ترجمهمتن یکی ازکتیبه های لاخ مزارآورده می شود."مهربان- خستوان ومهربان کهرهبری می کند درست- درست هدایت می کند- پرورش می دهد-پیرایش میکند- میگرداند." بطورکلی بررسی این اثر ارزشمند نشان دهنده حضورواستقرارانساندرمنطقه ازدوران پیش از تاریخ است. سنگ نگاره کال جنگال به فاصله 35کیلومتری جنوب غربی بیرجند در دامنه ارتقاعات معروف به رچ واقع شده است. این سنگ نگاره به لحاظ نقوش دارای اهمیت ویژه ای دربین آثار بجای مانده ازادوار کهن در منطقه می باشد. در این سنگ نگاره یک مرد که به احتمال زیادیکی از شاهزادگان پارتی است با یک شیر به نبرد پرداخته است. حوزه فرهنگیواجتماعی بیرجند طی قرون متمادی شاهد مهاجرت اقوام گوناگون به منطقه بودهاست بطوریکه دراین گستره فرهنگی به راحتی میتوان اقوام ونژاد های مختلفراازهم تمایز داد. اسناد ومدارک مستند ومعتبری وجود دارد که نشان می دهد درقرون متمادی قوم ساگارتی در این منطقه زندگی کرده اندتا آنجا که هرودت مورخبزرگ در قرن پنجم پیش ازمیلاد به این قوم اشاره کرده است ودرباره آنهامینویسد:"آنها در رنیف اقوام شرقی هستند واز سکنه ساتراپ چهاردهم هخامنشیانبه شمار می روند"در دوره ساسانیان منطقه قهستان ایالتی بوده در بین شهر هایبزرگی چون هرات ونیشابورکه علاوه بر آبادانی وداشتن روستاهای حاصلخیزمردمانوجنگ آورانی با استعداد وسلحشور داشته است که این مردمان همیشه مایه دلگرمیحکومت مرکزی ومنشا قدرت در این حوزه محسوب می شده اند.مورخان فتح شهر هایخراسان توسط مسلمانان را سال22 هجری قمری و بعضی دیگر29 هجری قمری ثبتنموده اند. در آن سالها حکمرانان منطقه قهستان سران قوم هیاطله بودند که درمصاف با اخنف بن قیس سردار مسلمین شکست خوردند ودر نتیجه سرزمین قهستان فتحشد ازآن به بعد خلفای عباسی مدت زیادی براین منطفه حکم راندند. ولی از زمانحسن صباح تا پیدایش قوم مغول حکومت قهستان در دست امرا وحکام اسماعیلیهبود. منطقه قهستان یکی از مراکزعمده سیاسی به شمار می رفت که بعد ازالموت،مهمترین مقر حضور فدائیان اسماعیلیه بوده است،موقعیت خاص منطقه یعنیدوری از مرکز حکومت ،وضعیت طبیعی منطقه وکوههای بلند وصعب العبورازمهمترینعلل جذب فدائیان اسماعیلیه در این منطقه بوده است؛ قلعه های عطیم وبا شکوهینظیر: قلعه کل حسن صباح،قلعه رستم و... از مشهور ترین قلاع اسماعیلیه درقهستان می باشد.وجود این قلعه ها می تواند به عنوان یکی از شاخص ترین جاذبههای گردشگری این منطقه باشد. چنانچه تحول چندانی ار دوره مغول تا دورهصفویه دراین سرزمین صورت نگرفت، تا اینکه با قدرت گرفتن حکام صفویه و امرایآنها و انتقال مرکزیت قهستان از قائن به بیرجند،این شهر وروستاهای پیرامونآن رونق وآبادانی تازه ای گرفت تا آنجایی که توسعهاقتصادی،اجتماعی،سیاسی،نظامی وفرهنکی آن روز به روزبه روز رونق ورواج مضاعفبخود گرفت،که در آثار بجای مانده از آن دوران کاملأ مشهود است. اولینبارنام بیرجند در کتاب رزشمند معجم البلدان ذکرشده وپس زآن سیاحان،مورخاننویسندگان بسیاری مانندیاقوت حموی،احمد مقدسی،حمدالله مستوفی،حافظ ابروو... هر یک به سهم خود ازشهر بیرجند وعظمت آن زبان به ذکر وتوصیف بازکرده اند.
بناهای با شکوه وعظیم به یادگارمانده ازادواره پیشین به خصوص دوره صفویهوبعدازآن هریک به تنهایی دارای غنای فرهنگی ومذهبی یا سیاسی ونظامی منحصربفردخود هستند.دربین قلاع تاریخی،قلعه فورگ نه تنها یکی از زیباترین وشکیلترین قلاع منطقه به شمارمیرود بلکه درنوع خود از لحاظ جایگاه قرارگیریوساختارمعماری یکی ازمنحصر به فردترین قلاع ایران میتواندباشد.این قلعه درروستایی به همین نام درفاصله 90 کیلومتری شهربیرجندقراردارد.بنای اولیهقلعه در زمان نادرشاه افشاربنانهاده شده است.تاسیسات داخلی قلعه دارای سهبخش اصلی وهسته مرکزی آن یعنی ارگ قلعه مربوط به حکام وامرای ساکن قلعهبوده است. قلعه فورگ بر بالای صخره ای سنگی همراه با 18 برج پس از قرونمتمادی همچنان در گستره تاریخ بیرجند قامت خود را استوار نگه داشته است تاتلخ کهمی ها وکامیابی های روزکار را شاهد باشد. از دیگر قلاع زیبا وبا شکوهمنطقه،قلعه شهر بیرجند با نام قلعه پایین شهر با2500 متر مربع مساحت،سالیاندرازیست که شهربیرجند رازیر پای خوداستوار نگه داشته است. این قلعه خشتوگلی با چشم اندازی دل فریب بر فراز تپه ای به نسبت عظیم در داخل بافتقدیمی شهر نا خودآگاه توجه هر بیننده ورهگذری را بسوی خود جلب می کند.بنایاولیه قلعه مربوط به دوره صفویه بوده ودرچهار گوشه آن برجهایی تعبیه واحداثشده است. در فاصله پنج کیلومتری جنوب شهر بیرجند،در ارتفاعات موسوم بهباقران سد قدیمی بند دره به چشم می خورد که طی قرونی چند همچنان عظمت وشکوهخود را در بین کوههای مقدس باقران حفظ نموده علاوه بر آنکه بستری مناسببرای گردشگران می باشداستوار وپایدار امید بخش کشاورزان پایین دست خودودرختان همیشه تشنه منطقه می باشد.
ساکنان بیرجند برای اماکن مذهبی وبقاع متبرکه اهمیت ویژه قائل هستند. هر یکاز این آثار علاوه بر آنکه دارای فرم وشکل وهماهنگی بین بخش ها از لحاظمعماری و ساختار میباشند از لحاظ مردم شناسی دینی نیزقابل توجه هستند.ازجمله این بناها میتوان به مسجد جامع پایین شهر اشاره داشت این مسجد در نوعخود بی نظیرو فضاهای روحانی ایجاد شده در داخل آن توجه هرمومنی را بیش ازپیش بسوی خدا وعظمت خالق رهنمون میکند.در مرکز بافت قدیمی شهر بیرجند بهفاصله اندک از مسجد جامع پایین شهر مکان مذهبی دیگری به نام مسجد جامع چهاردرخت خود نمایی می کند. این مسجد نیز دارای اهمیت واحترام ویژه ای در میانمومنان میباشد.اگرچه بنای مسجد فاقد تزیینات پر کار ویا گچبری وکاشیکاریآنچنان می باشد،ولی ساختار معماری آن،آجر کاری وآجر چینی،تاغ هایجناغی،رسمی بندی و ... نشان دهنده آن ای زیبا برتری خود را نسبت به دیگربناهای موجود نشان میدهد. خانه آراسته درداخل بافت قدیم شهر بیرجند بازیدایی خاص وترکیب بندی مناسب فضاها همراه با هماهنگی بین هر یک از بخش هایبنا آن رااز دیگر بناهای بیرجند متمایز نموده است. بنا با دارا بودن عناصریچون : سر در ورودی،هشتی،دهلیز،حیاط مرکزی،ایوان،اتاق های متعدد در چهار سویبنا،پوششهای گنبدی،دیوار وجرزهای قطور،بهره گیری از خشت وگل در ساخت بناوغیره باعث شده اند تا این بنا از لحاظ ارزش های معماری وهم سویی با گرایشهای مذهبی،اجتماعی واقتصادی ساکنان آن ممتاز جلوه نماید.حسینیه ومدرسه نوابمربوط به دوره شاه عباس صفوی بوده وکتیبه موجود در سر در آن سال 1001 هجریقمری را نشان می دهد. در ضلع جنوبی بنا ایوان به نسبت بزرگی وجود دارد کهبخش داخلی آن با استفاده از نقوش اسلیمی بصورت مشبک گچی کار شده است. درصلع شرفی بنا اتاق بزرگی همراه با نور گیر،رسمی بندی با ملات گچ،گچبری هایمتعدد،تزیینات مقرنس کاری شده،کتیبه های گچی وگچبریهای اسلیمی چشم نوازی میکند. هشتی،صحن،دو ایوان،چندین اتاق همراه با پنجره های متعدد از ویژگی هایاین بنا به شمار میروند.مفبره ابن حسام خوسفی در شهرخوسف بر فراز تپه ایسنگی با پلان چلیپایی وپوشش عرقچین با گنبد کلاه فرنگی شکل می باشد. ابنحسام از شعرای قرن 9 هجری و مصادف با عهد شاهرخ تیموری است.این بناباتزئیناتی از قبیل:رسمی بندی درگوشه ها،کتیبه موجود دردورتادورپایه پوششگنبدو طرحهای چلیپایی وپنجر،هشتی،صحن،ایوان وغرفه هایی در دوطرف صحنمیباشد.سر درورودی با تاق جناغی همراه با تزئینات آجری به شیوه چلیپایی دردو طرف سر در ورودی ازعناصر شاخص معماری این بنا بشمار می رود.پسازسردرورودی هشتی قرارداردوپس ازآن بلافاصله وارد صحن می شویم.در ضلع شمالیصحن،ایوانی با تاق جناغی وتزئینات رسمی بندی وآجرکاری درنمای خارجی بیش ازهمه خودنمایی میکند.فرهنگ غنی منطقه وعلاقه مندی مردم به فراگیری علوم جدیدوقدیمه باعث شده در غالب نقاط شاهد مراکز فرهنگی وآموزشی باشیم. از جملهاین بناها می توان به مدرسه شوکتیه با سابقه روشن وگذشته ای پر از خاطرهبرای صاحبان اندیشه در شهر بیرجند وتوابع آن اشاره داشت.مدرسه شوکتیه بنابر اسناد ومدارک مستدل تاریخی در سال 1312 هجری قمری ساخته و همزمان باتاسیس مدرسه بزرگ دارالفنون در سال 1326 هجری قمری همزمان با اوج قدرتسیاسی شوکت الملک تبدیل به یکی از مراکز آموزشی معتبر کشورگردید. مدرسهشوکتیه پرچم داروپایه گذار فرهنگ نوین ومدارسی بود که امروزه از نظرکمیرشدکم نظیر واز جهت کیفی ارتقاء چشمگیری یافته است. از مشخصه های معماریاین بنای با ارزش تاریخی میتوان به هشتی،دهلیز،ایوان رفیع،حیاط مرکزی،حجرههای دور تادورحیاط،شاه نشین وغیره اشاره داشت. مدرسه عصومیه اگر همپایمدرسه شوکتیه نباشد،از لحاظ تاریخی وفرهنگی سابقه ای هم اندازه باآن رابرایخود به همراه دارد. در بالای سر در ورودی کتیبه؛"انا مدینه العلم علیبابها"همراه با تاریخ 1368 هجری قمری درج شده وچهار کتیبه در دهلیزورودی آنقرار دارد.دردو ضلع شرقی وغربی حیاط ایوان هایی با ستون های آجر کاری شدهبا تزیین مهری وحجره هایی مخصوص طلاب همراه با آجر کاری شده چشم نوازی میکند.مقبره حسام الدوله مدفن یکی از حکام منسوب شده از طرف شاهان قاجار درمنطقه بیرجند میباشد. بنا برروی صفه ای قرارگرفته و از آنجا می توان قسمتاعظمی از شهر بیرجند رادید. آینه کاریهای زیبا با استفاده از طرح های متنوعهندسی در تمام سطح داخلی اتاق از مشخصه های عمده این بنا به شمار میرود کهدر نوع خود کم نظیر میباشد. به دلیل حاکم نشین بودن شهر بیرجند در گذشته هماکنون آثار بسیاری از بنا های متعلق به آنان در منطقه به چشم می خورد کهروزگاری نه چندان دور محل سکونت ومامن امرا محلی، اعیان واشراف بوده است.دراین میان باغ وعمارت اکبریه بیش از همه نگاه پرسشگر هر بیننده ای را بسویخود جلب میکند،تا انسان را بی اختیار وادار به مدح وستایش طراح وسازندهبنای عظیم وباغ با شکوه اکبریه نماید.
این باغ وبنا در زمینی به مساحت 8000 متر مربع درسه طبقه مجزا مربوط بهدوره های زندیه تا اوایل دوره پهلوی طراحی واحداث شده است.مهمترین بخش آنقسمت شرقی بنا می باشد که در دو طبقه و همزمان با حکمرانی شوکت الملک ساختهشده است. تزئینات آن شامل :تالارآینه،میانخانه وگنبدعرقچین وتزئیناتمقرنس،رسمی بندی وغیره می باشد.هم اکنون دوگنجینه ارزشمند باستان شناسیومردم شناسی،چایخانه سنتی،سفره خانه سنتی،کارگاههای مربوط به آموزش هنرهایسنتی وغیره برای بازدید کنندگان ومشتاقان آثارویادگارهای تاریخی شهر کهنبیرجند می باشد.بنای زیگوراتی شش اشکوبه ای ارگ کلاه فرنگی(ارگ میر حسنخان)از بناهای منحصر بفردوشاخص شهر بیرجند می باشدکه چون برگ زرینی در دلشهر بیرجند می درخشد.بنا در اصل محل حکومت حسام الدوله بوده وزمان ساخت آنبه دوره زندیه می رسد.بنا در شش طبقه احداث شده است ولی تنهادو طبقه آندارای کاربری می باشد.مقرنس کاری فضای حوض خانه،تزئینات گلدانی،کاربندی ازنوع لانه زنبوری،رف های تزئینیوغیره از عمده ترین تزئینات وزیبایی های اینبنای شکیل می باشد.از لحاظ فرم بندی وشکل خاص این بنامیتوان آن را در شماریکی از کم نظیر ترین وشاید بی نظیر ترین بناهای ایران قلمداد نمود.
باغ وامارت رحیم آباددر سال 1315 هجری قمری به منظور دارالخلافه بیرجندساخته شد.بدلیل وجود فضای محوطه باغ،عمارت اصلی،بنایورودی،استخر،حصار،برج،حوض خانه،تزئینات آینه کاری، گچبری همراه با نقوشاسلیمی گل وبوته باعث شده انداعتبار وارزش باغ وعمارت رحیم آباددر بینبناهای دیگر بیرجندبیش از پیش جلوه گری می نماید.
خانه فرهنگ که هم اینک مسکن خصوصی یکی از خانواده های اصیل وبا فرهنگ شهربیرجندمی باشدکه دربین بناهای مطرح در داخل بافت قدیمی بیرجندخودنمایی میکند.این بنا با حیاط چهار ضلعی همراه باآجرچینی درکف آن واستفاده از آجرهایقالبی و تراش دار در نمای داخلی بنا با بهره گیری از تکرار نقوش و طرح هایموجود توجه هر بیننده ای را بسوی خود می کشد.
علاوه بر شهر بیرجند نقاط مسکونی دیگری مانند : خور،درمیان، خوسف، فورک،نهبندان، سربیشه و... از لحاظ بافت وترکیب بندی بناها در کنار یکدیگر قابلتوجه ودقت هستند.برای نمونه بافت روستای خور در نوع خود با ساختاری هماهنگبا شرایط زیستی واقلیمی نه تنها توانسته است در برابر شرایط دشوار طبیعی بهحیات خود ادامه دهد بلکه فرم ونحوه قرار گیری بناها در کنار همدیگرهربیننده ای را بسوی خود جلب می نماید.صنایع دستی موجوددرشهربیرجندوروستاهای حاشیه آن بیش ازهمهشامل:سفالگری،رنگرزی،آهنگری،مسگری،حصیربافی،سبدبافی،نمدبافی،زیلوبافی،نوغانداری،ریسندگی،گلیم بافی،جاجیم بافی،پلاسودههاصنایع دستی دیگرمی باشد.بایدتوجه داشته باشیم که هریک از صنایع دستی فوق دارای مراحل خاص ونیاز بهمهارت کافی دارد.برای مثال دربافت گلیم به بافته هایی چون:بافت سادهمتعادل،بافت پود نما،بافت چاک دار،بافت یک پیچی وبافت دو پیچی توجه میشود.سفالگری تنها در روستاهای شاه زیله وکوشه آن هم به صورت ساده و ابتداییبدون بهره گیری از فن لعاب دیده میشودو اما فرش بیرجندوروستاهای این منطقهاز لحاظ بافت،طرح،رنگ و غیره در نوع خود بی نظیروشهره خاص وعام است بطوریکه نقوش موجود در بافته های این منطقه به مقدار زیادی متنوع و گوناگون میباشد.از جمله این نقوش و طرحها می توان به:ریز ماهی ساده،ریز ماهیترنجدار،ریز ماهی پنج متن،بته جقه ای،گلدانی،کله اسبی،خشتی وغیره اشارهداشت.در اینجا به پاس زحمات تلاش گران عرصه هنر فرش به ذکر نام برخی ازطراحان فرش از قبیل:محمد زهرایی(1294-درخش)،سید هاشمزهرایی(1331-درخش)،محمد قنبری(1308-کوشکک) و.... مسافران بیرجند با سفربهاین شهر خود را در داخل حجم انبوهی از سوغات وتحفه های این شهرمی بینند.از جمله سوغات حوزه بیرجند می توان بهزرشک،زعفران،عناب،بادام،گردو،کشک سیاه و زردوزیره ای،قره قروت،آلوخشک،برگههلوو...اشاره کرد.موسیقی حوزه بیرجند در نوع خود شهره عام وخاص است.بانگاهی به حرکات موزون رقصندگان،آهنگهاونواهای هماهنگ با حرکات رقصندگان مارا به تاریخ کهن سرزمین یادگارهای تاریخی می برد.نواها وآهنگهای موجودبرگرفته از طبیعت واقلیم منطقه بوده وریشه در عقاید وافکار مردمان آن دیاردارد.از جمله حرکات موزون همراه با نوای موسیقی بیرجندمیتوان به:رقصاصیل،چپ وراست،زانو سر ضرب،احوال،چپ،راست،چغل،فورگی،چنشتی،نارهناره،بخواب،به خاک ورقص چوب اشاره کرد.در کنار نمایشها ورقصهای محلی ورزشباستانی بیرجند به دلیل وجود مردان و جوانان غیور بیرجند نه تنها در حوزهبیرجند شناخته شده است،بلکه بیش از پنج بار توانسته مقام نخست کشوررا بهخود اختصاص دهد. حسن ختام این نوشتار کوتاه رامزین به نام فرزانگان،مشاهیرونام آوران بیرجند این مردمان فرهنگ دوست وفرهنگ پرور می کنیم.آنان سالیاندرازی است که همانند ستاره ای پر سو در دل کویر می درخشندوبسیاری ازناملایمات وسختی های اقلیم منطقه را به شیرینی کلام آثاروحضورپر برکت خودمزین نموده اند.بهترین گواه این سخن اندیشمندانی چون:حکیم نزاری،شاعروغزلسرای قرن 7 هجری است.وی علاوه بر مدارج علمی دارای آثاریچون:سفرنامه،ساقینامه،ادبنامه،مثنوی،دستورنامهو...است.مولانا شمس الدین زاهد خوسفی در ابتدای قرن 7 هجری مبلغ دین اسلامبود است.همچنین مولانا محمدبن حسام معروف به ابن حسام از عرفاوشعرای قرن8و9 هجری بوده که در صرف ونحو،معانی وبیان،نجوم وتاریخ،تفسیروحدیث مهارتویژه ای داشته است حاج شیخ محمد هادی هادوی متولد 1239 شمسی در بیرجنداست.وی پس از تحصیل در شهر های بیرجند،مشهد،سامراودیگر عتبات عالیات جهتخدمت به مردم کمر همت بست.او جزو چهار نفر از علمایی بود که مراجع تقلیدنجف برای نظارت بر متمم قانون اساسیمشروطیت تعیین کرده بودند.ازآثاراومیتوان به:مائدهمحمدیه،بستان الناظر،ترجمه ادب الکبیر،دیوانقصایدوغزلیات و...اشاره کرد.شیخ محمد باقر آیتی ازنوابغ بیرجند به شمار میرود.در باره او همین اندازه باید سخن بگوییم که وی عالم فاضل،متبحر ونکتهدانی بودکه در زمان حیات خود22 عنوان تالیف از خود به یادگار گذاشت.علامهعبدالعلی بیرجندی ازدیگر سرآمدان این سرزمین در فن ریاضی وهیئت می باشدکهدر علوم عقلی ونقلی از بزرگان دوره خود بوده تا آنجاکه علامه شیخ بهایی نزدوی ریاضی وحکمت می آموخت.دکتر محمدحسن گنجی بنیانگذار جغرافیای نوین ایرانواستادممتازدانشگاههای کشور می باشدکه بارها توانسته است در مجامع علمیتوانایی خود را در عرصه جغرافیای نوین نشان دهد.دریغ وصد افسوس که ما توانارائه تمام زیباییهای بیرجندوکویرنشینان آن خطه رانداشتیم.این نوشتار کوتاهتنهامقداراندکی از فرهنگ،تاریخ،تمدنواندیشه های کهن این سرزمین بوده است.
منبع :سازمان میراث فرهنگی خراسانجنوبی
شهرستان نهبندان
شهرستان با 41102 کیلومتر مربع وسعت،جنوبی ترین شهر استان خراسان است.این شهر در طول جغرافیایی 60 درجه و30 دقیقه وعرض جغرافیایی 31 درجه و33 دقیقه ودر ارتقاع 1196 متری ازسطح دریای آزاد قرار گرفته است.در مورد وجه تسمیه نهبندان این نظریه وجود دارد که نه یا نیه در فارسی به معنی شهر است. در گذشته بیشتر تواریخ از این شهر با نام نه یا نیه یاد کرده اندواحتمالأ از قرن هفتم به بعد ((نهبندان)) نامیده شده است. علت این امراینست که روستای بندان در 75 کیلومتری شرق ((نه)) به صورت زندان حکام سیستان بوده وظاهرأ شهرت این زندان به همه جا رسیده وزمانی که از نه سخن به میان می آمده (نه) بندان معرف خوبی برای آن بوده است. در جایی از تاریخ سیستان آمده: نه از شهرکهای سیستان ودر سرحد قهستان واقع بوده وامروزهم قصبه ای است ونه وبندان در عرض یکدیگر ونزدیک به هم آمده اند. ایزو خارا کسی به نه در زمان اسکندر مقدونی اشاره می کند. حمد ا... مستوفی در نزهه القلوب نه را ازاقلیم سوم بر می شمارد که آنرا اردشیر بابکان ساخته است. وی می گوید: چون اردشیردر مغازه شهر نه بساخت،شاپوربن اردشیر حاکم خراسان بود. از پدرآن شهررا درخواست کردواو مضایقه نمود وشاپورراغیرت آمدوآنجا (نیشابور) تجدید عمارت(نه شابور) نام نهاد. سایر منابعی که از نه به نوعی نام برده اند عبارتند از: صوره الارض(ابن حوقل)،حد.د العالم طبقات ناصری،انجمن آرا،فرهنگ آنندارج،تاریخ یعقوبی احیاء الملوک و...
آسباد های نهبندان
شرایط دشوار مناطق کویری وبیابانی ایران باعث شده تا مردم کویرنشین از ابتکار وخلاقیت خود استفاده کرده وبا حداکثر بهره گیری ازعوامل وشرایط طبیعی آنرا در اختیارخود درآورند.آسبادهای ازجمله این خلاقیت ها هستند که در اکثر مناطق جنوب خراسان بخصوص روستاهای شهرستان نهبندان دیده می شوند. منطقه نهبندان به دلیل گسترش دامنه بادهای 120 روزه سیستان تا این منطقه از این نظرامتیازویژه ای داد. بیشترین تعدید آسبادها در داخل شهر نه قرار داشته سون هدین جغرافیدان از آن نام برده که 400 خانه و75 آسباد داشته است. این تعدید آسباد در یک فصل قادر به آرد نمودن 6000 تن گندم بوده اند. در روستاهای رومه،چهارفرسخ،خونیک پایین،خوشاره حمند و... آسباد هایی وجود دارند.
قلعه نهبندان
قلعه عظیم نهبندان که ازخشت وچینه ساخته شده ،در داخل شهرنهبندان قرارگرفته است. با توجه به نقشه بنا واشیاء سفالی بدست آمده از قلعه،سابقه تاریخی آن به دوران قبل از اسلام یعنی دوران اشکانی وساسانی بر می گردد. قلعه در دوران اسلامی تا دوران صفویه فعال بوده ودر دوره صفویه بطور کامل متروک شده است.وجوداین قلعه صحت ادعای بعضی منابع تاریخی که سابقه شهرنهبندان را به دوران پیش ازاسلام می رسانند،تایید می کند.
قلعه شاهدژ
قلعه شاهدژ در5 کیلومتری شرق شهرستان نهبندان قرار دارد.این قلعه عظیم سنگی،بنایی است دفاعی مربوط به فدائیان اسماعیلی.مصالح بنا تماما از سنگ و آجر است که در بعضی قسمتها سنگها بدون استفاده از ملات بر روی یکدیگر قرار گرفته اند.در داخل قلعه فضاهایی نظیر اتاقهای سربازان،اصطبل،آب انبار،برجهای دفاعی،حصار انبار آذوقه وسایرقسمتهای ضروری وجود داشته است.طبق بررسیهای به عمل آمده این قلعه گنجایش سه هزار نفررا در خود داشته است.قابل توجه است که شالوده این بنا متعلق به دوره ساسانی است که در دوران اسلام توسط لسماعیلیان خریداری، بازسازی ومورداستفاده قرار گرفته است.
قلعه بندان
قلعه بندان از آثار تاریخی وکهن شهرستان نهبندان است که در فاصله 75 کیلومتری شرق نهبندان ودر روستایی به همین نام واقع شده است.این اثر تاریخی که متعلق به دوره تیموری است تا پایان دوره قاجار به عنوان دژی محکم واستوار پا بر جا بوده است.این بنا مشتمل بر یک ایوان ورودی،یک صحن وسیع با چهار ردیف اتاق و یک حصار بلند است که دور تادورقلعه را فرا گرفته است.در چهار گوشه قلعه برجهای بلندی قرار داشته که امروزه تنها یکی ازآنهادر ضلع جنوب غربی قلعه سالم مانده است.آنچه بیشترازهرچیزدیگرنظربازدیدکنندگان را به خود جلب می نماید درب ورودی قلعه وقطعه سنگ بسیارسنگین وبزرگی است که بطرزماهرانه ای تراشیده شده است ورودی قلعه یک فضای مربع شکل کوچک است که به صحن بزرگ قلعه منتهی میشود.
مسجد میغان
مسجد تاریخی میغان در داخل بافت قدیمی و تقریبامتروکه روستای میغان از توابع شهرستان نهبندان قرار دارد.بخشهای مختلف بنا عبارتند از:سردرورودی،صحن،شبستان ستوندار،گنبدخانه،شبستان تابستانی وقناتی که از زیر مسجد عبور می کند.شبستان ستوندار دارای چهار ستون چهارضلعی، پوشش گنبدی،دو محراب وپنجره مشبک گچی جهت تامین نور شبستان و تهویه هوای داخل شبستان می باشد.زمان ساخت این بنا بر اساس نوع نقشه به دوره صفویه بر می گردد.این بنا بطور کامل توسط میراث فرهنگی بیرجند مرمت وبازسازی گردیده است.
مسجد طارق
مسجد تاریخی طارق در 40 کیلومتری شمال نهبندان در روستایی به همین نام واقع شده است.این مسجد شامل شبستان ستونداری است که حد فاصل ستونهابا طاق جناغی وسپس حد فاصل طاقها نیز با پوشش گنبدی به صورت چهار ترک پوشیده شده است.این مسجد دارای سنگ لوحی است که تاریخ ساخت بنا(1096ه.ق) برروی آن حک شده است.این سنگ دارای 40 سانتی متر طول و20 سانتی متر عرض است ودر مرکز آن نقشی وجود دارد که احتمالا سازنده آن اشاره به مهر نبوت که بر میانه دوکتف پیامبر(ص) وجود داشته،کرده است.
مسجد عاشورا خانه
بنای تاریخی مسجد عاشورا خانه در خیابان قائمشهرنهبندان و در فاصله کمی از قلعه تاریخی نهبندان قرار دارد.بنا شامل یک شبستان ستوندار ودارای چهار ستون قطور چهار ضلعی بوده که در ضلع شمال با برداشتن دیوار،شبستان را توسعه داده اندو دو ستون دیگر را به آن افزوده اند.پوشش شبستان به صورت گنبدی وچهار ترک است. بر روی یکی از ستونها کتیبه هایی به انواع خطوط نستعلیق وشکسته نستعلیق دیده می شود.بعضی از این کتیبه ها دارای تاریخ هستند که قدیمی ترین این کتیبه ها دارای تاریخ1315 است. با توجه به وجود سنگ لوحی که در دیوارمسجد کار گذاشته شده ودارای تاریخ 977 است می توان زمان ساخت مسجد را به دوره صفویه نسبت داد.
مدرسه هدایت
این بنا در سال 1307 ه.ش به عنوان اولین مدرسه نهبندان ساخته شده است.این بنا بیان کننده ویژگی های معماری ذوره پهلوی است.مهمترین ویژگی این بنا اصل قرینه سازی درآن است به گونه ای که با ایجاد یک محور با جهت شمال شرق،جنوب غربی عناصر معماری به صورت قرینه در دو طرف این محور ایجاد شده است. بنا در دو ضلع جنوب غربی وشمال شرقی دارای دو ایوان ستون دار است. هر کدام از ایوان ها با چهار ستون چهار ضلعی به داخل بنا امتداد می یابند. این بنا از لحاظ نوع مصالح استفاده شده ونحوه پوشش اطاقها بر اساس معماری ایرانی واز لحاظ نقشه و عدم برخورداری از فضاهای معماری ایرانی از قبیل هشتی،دهلیز،سردرورودی،حجرا های اطراف حیاط و... بر اساس معماری اروپایی شکل گرفته است وبطور کلی مانند معماری غربی به شیوه برونگرایی احداث شده است.
خانه سالار حسین دهداری
بنای تاریخی خانه سالار حسین دهداری در درون بافت تاریخی شهرنهبندان قرار گرفته است. این خانه دارای سردرورودی،دهلیز صحن،ایواناز اطاق های وباغ است. ورودی دارای طاق جناغی است که تمامأ از خشت ساخته شده ودارای طاقنماهای کوچک تزیینی نیز می باشد. پس از ورودی دهلیز قرار دارد که با چرخش 90 درجه به سمت شمال به صحن راه می یابد. در سمت شمال صحن،ایوان بنا که مانند سایر خانه های نهبندان دهرای طاق مازه ی است،وجود دارد. در دوطرف ایوان دو اطاق وجود دارد که یکی دارای پوشش چهار ترک ودیگری دارای پوشش عرق چین با اندود گچ است پس از ایوان نیز باغ سرا قرار دارد. بنیان این بنا احتمالامربوط به دوران صفویه است که در دوران مختلف مورد تعمیروباز سازی قرارگرفته است.
بافت سنتی روستای استند
در 29 کیلومتری جنوب نهبندان، روستای استند قرار دارد که برخورداراز ویژگی های معماری سنتی است،این روستا در منطقه ای کوهستانی ودر درون دره ای قرارگرفته که از لحاظ ساختار ومعماری،کاملا اصیل و دست نخورده باقی مانده است.مهمترین مصالح استفاده شده در ساخت خانه های مسکونی سنگ می باشد.این روستا دارای بافت فشرده ومتمرکزاست که کاملا با ویژگیهای درونگرای معماری ایران مطابقت دارد.کوچه های تنگ وپیچ در پیچ ارتباط میان بخشهای مختلف را بر عهده دارند.این بافت اصیل وسنتی به لحاظ مطالعه و پژوهش معماری خاص روستایی وتاثیرآن بر ویژگیهای اقتصادی،اجتماعی،اعتقادی مردم روستا وفرهنگ آنها اهمیت فوق العاده دارد.
قدمگاه حضرت ابوالفضل(ع)
در هشتاد کیلومتری شرق نهبندان بنایی وجود داردکه به اعتقاد اهالی قدمگاه حضرت ابوالفضل(ع) می باشد.این بنا شامل ورودی،صحن وگنبد خانه می باشد.از ویژگیهای مهم این زیارتگاه،نقشی است که در اعتقادات ورسوم مردم منطقه دارد.وجود سردیس بز کوهی که در بخشهای مختلف تعبیه شده بخصوص دو طرف ورودی صحن ونیز ورودی گنبدخانه از دیگر ویژگیهای جالب این بنا است که ارتباط مستقیمی با رسوم مردم محل دارد.
مزار سیدعلی
آرامگاه امامزاده سید علی در 90 کیلو متری شمال شهرنهبندان واقع شده ومورد توجه خاص پیروان اهل بیت(ع)است.بنای آرامگاه در سالهای اخیرتوسط اداره اوقاف وامور خیریه شهرستان نهبندان بنا شده وروز به روز در حال گسترش وتوسعه می باشد.
مشاهیر وفرزانگان
این سرزمین همچون دیگر سرزمینها از عهده وظیفه ای که خالقش بر عهده او نهاده است به خوبی بر آمده واندیشمندانی را در دامان خود پرورانیده است .بزرگانی که اولین بار پشتشان را خاک گرم وتفتیده این دیار در آغوش کشیده وآخرین بار هم غریبانه در دل کویر صورت بر خاک پر مهر موطنشان نهاده وبا خاموشی چراغ وجودشان نام و یاد آنان نیزاز اذهان پاک گشته است.از جمله می توان به اندیشمندانی چون:بن عبدالرحمن بن عبدا...که نامشان موجب درخشش دیار کویر در صفحات تاریخ است.فقیه ابوبکرنیهی،نوابه خفی شاعره ای عارف که قدم در وادی عرفان گذاشت وغیره که در این نوشتار کوتاه نمی توان به معرفی آنها پرداخت،اشاره نمود.
هنرهای سنتی
هنرهای سنتی نهبندان عبارتند از:جاجیم بافی،گلیم بافی،قالی بافی،نمد مالی،حصیر بافی،
سبد بافی،پارچه بافی،سوزن دوزی و...از هنرهای سنتی است که ازدیربازبین زنان منطقه رواج دارد. سوزندوزی در نهبندان همانند سوزندوزی بلوچی استکه با نخهای مختلف از جنس پشم و بر روی پارچه ای به نام چپیدوچ انجام می شود. کاربرد سوزندوزی های منطقه بیشتر به صورت تزئین لباس،پشتی،جانماز،پرده ،حوله،زیر آئینه ای ورو بالشتی می باشد.پلاس بافی نیزازهنرهای سنتی است که در منطقه هنوز رایج است. پلاس بافی اکثرا با موی بز انجام می گیرد برای بافت پلاس ابتدا دار پلاس را بوسیله میخ سرپا میکنند. سپس شتها را از دو سر،جلو وانتها کار می گذارند وبعد به خاطر اینکه تارها به همدیگرنرسد وبه هم نخورد روی چوب کار را با گل می پوشانند.
منبع :سازمان میراث فرهنگی خراسانجنوبی
شهرستان قاین
شهرستان قاین در شرق ایران و جنوب استان خراسان جنوبی ،در حد فاصل 15و 33 تا 12و 34 عرض جغرافیایی و 38و58 تا 56و60 طول جغرافیایی قرار دارد.
این شهرستان از شمال به خواف و گناباد،از غرب به فردوس و از جنوب به بیرجند محدود شده واز جانب شرق مرزی به طول تقریبی 130 کیلومتر با کشور افغانستان دارد.ارتفاع این ناحیه از سطح دریاهای آزاد 1440متر و مساحتش بالغ بر 17722کیلومترمربع می باشد.. رشته کوه قهستان در غرب و شاسکوه و آهنگران در شرق آن سر به آسمان سوده و بلندترین قله منطقه "کمر سرخ" با 2842 متر در نیم بلوک و پست ترین نقطه با 610 متر در پترگان قرار دارد.
مراتع قاین از نوع متوسط است و در آن گیاهان دارویی گوناگون،جنگلهای تنگ پسته کوهی،بنه، قیچ و بادامشک دیده می شود.در شهرستان قاین خصوصاً در منطقه شکار ممنوع شاسکوه،قریب به 59 گونه پرنده ،25 نوع پستاندار و 17 گونه از خزندگان و دوزیستان منحصر به فرد زندگی می کنند. در این خطه رودخانه های با اهمیتی همچون رودشور، رود مردانشاه، رود بیهود، افین وآهنگران جریان دارند و گندم،جو،چغندر،پسته و خصوصاً زعفران وزرشک از محصولات کشاورزی این خطه اند.
پیشینه تاریخی
چنانچه تذکره نویسان و مورخان نقل کرده اند منطقه قاینات با تاریخی سی هزار ساله یکی ازاولین خاستگاههای تمدن خراسان است." فخرالاسلام" پیدایش قاین را به عصر" قابیل " پسر آدم نسبت داده و در فرهنگ " دهخدا" بنای اولیه شهر قاین به " سام بن نریمان" و در " احیاءالملوک" به " کی لهراسب" پدر " گشتاسب" منسوب شده است. این سخنان اگر چه از اعتباری علمی برخوردار نیستند اما بازگو کننده قدمتی هستند که چون غباری از روزگاران دور بر سنگ سنگ این شهر نشسته اند. در سفرنامه ی " سرپرسی سایکس" آمده: در328 قبل از میلاد 13هزارنفراز مدافعان شهرقاین به مقابله با لشکرانبوه" اسکندر" در آمدند و دکتر " بلووگلدسمید" اعتقاد دارد که " قلعه کوه قاین" درعهدهخامنشیان همان کاخ سلاطین" قهستان" یا" آتاگوانا" بوده است.
قاین در عصرزمامداری ساسانیان نیزازمراکزمهم قدرت وازمعدودشهرهای استراتژیک ایران به شمار می آمده است.مورخان بسیاری در کتب خویش از قائنات نام برده اند."اصطخری" در340 ه.ش از قاین بعنوان مرکزقهستان نام برده ومذهب آن خطه را شیعه ذکرکرده و" جیهانی" در375هجری از سه دروازه شهر به اسامی " درکون"، "درکلاوج" و" درزقان استخر" نام برده است.
ناصرخسرو قبادیانی در سال 440وارد قائنات شده و قاین راچنین توصیف نموده: قاین شهری بزرگ و حصین وگردآن خندقی ومسجدآدینه به شهراندراست وآنجاکه مقصوره است تاقی عظیم وبزرگ است که درخراسان ازآن بزرگترندیدم." مارکوپولوی ونیزی" هوای قاین را در نهایت اعتدال دانسته و"یاقوت حموی" و" عبدا...محمدبن احمدمقدسی": آنجا رابندرخراسان و خزانه کرمان معرفی کرده اند. قاین در جریان تندباد ایلغارهای تاریخی صدمه چندانی ندیده است و چنانکه نقل شده در773 هجری امیرتیموردر حوالی قاین اردو زد ولیکن به فضل و درایت حاکم شهر بدون جنگ و خونریزی از کنار آن گذشت.
درعصرصفویه نیزبه سال1002 هجری، شاه عباس صفوی ازقاین دیدن نمودو سالها بعد درزمان سلسله زندیه هنگامی که لطفعلی خان زند ازکرمان گریخت و به قاین آمد،در آنجا از وی پذیرائی شد.قائنیان در بازگشت نیز تعدادی سوار جهت جنگ با آغامحمد خان قاجاردراختیار وی قراردادند.من حیث المجموع تاریخ و حوادث تاریخی قاین چنان گسترده و بسیط است که در این مختصر نمی گنجد. در پایان به سخن " دکتر ژوزف انگلیسی"اکتفا می کنیم که قاین را از مناطق آباد خراسان و قرارگاه مردان دلیری می دانسته که از راه شمشیرزنی و کمان کشی روزگار گذرانده اند.
دژها و قلاع باستانی
آثار تاریخی، فرهنگی و مذهبی :
کثرت و پراکندگی آثار تاریخی در شهرستان قاین چنان بسیار است که در این کوتاه نوشته مجال واگویه ی تمامی آنها نیست.در این شهرستان قریب به یکصد وسی و اندی، بنا،منطقه و غار باستانی شناسایی شده است که از این میان تا حد توانمان مهمترین آثار و ابنیه را برگزیده ودر ذیل عناوین قلعه ها، مساجد، آب انبارها و رباطها، منازل تاریخی، مقابر و آرامگاهها به معرفی آنها پرداخته ایم. علاوه بر عناوین ذکر شده درختان کهنسال قاین و غارهای شگفت انگیز و تاریخی این منطقه را نیز به طور اجمالی معرفی خواهیم کرد.
قلعه آفریز :
بنای قلعه آفریز در میان روستای آفریز در 65 کیلومتری جنوب غربی قاین قرارگرفته با نظر به شواهد و ساختار معماری، این بنا را می توان به دوره صفویه منسوب نمود.قلعه آفریز دارای پلانی نا منظم است که 5 ضلع به اندازه های متفاوت دارد. این قلعه دارای 9 برج مرتفع می باشد که باعث استحکام بنا شده اند و نیازهای دیده بانی را برطرف می کنند. (شماره ثبت آثارملی:4805 )
از دیگر قلاع و دژهای باستانی که در شهرستان قاین قرار دارند می توان از حسن بای خان، قلعه خوک، قلعه قلاع و قلعه اسفشاد، قلعه افین، قلعه شاهرخت، قلعه آهنگران و قلعه کوه آبیز نام برد.
قلعه کوه قاین(قلعه حسین قاینی) :
قلعه حسین قاینی مشهور به قلعه کوه در فاصله ی5 کیلومتری جنوب شهر قاین بر فراز کوهی صعب العبور ساخته شده است.این قلعه از سمت جنوب و شرق به کوهستان و از سمت غرب و شمال به دشت قاین محدود شده ، در مورد قدمت قلعه کوه نظرات گوناگونی ابراز شده برخی همچون " سرپرسی سایکس " معتقدند که این قلعه بخشی از شهر آرتاگوانا است که در دوره هخامنشیان مقابل هجوم لشکریان اسکندر ایستادگی کرد و برخی دیگر عقیده دارند که این قلعه یکی از قلاع بیادگار مانده از دوره ساسانی است.شکل معماری و فرم طاقها، طاقچه ها و در گاههای به جا مانده قدمت قلعه را تا دوره ساسانی تایید می کنند. آنچه مبرهن است اینکه: قلعه فعلی احتمالاً بر ویرانه های قلعه قدیمی ساخته شده.این قلعه در عصر سلجوقی به دستور قاضی حسین قاینی که از جانب حسن صباح مامور ترویج فرقه اسماعیلیه در قهستان و خراسان شده بود، ساخته شد.
مصالح عمده ای که در ساختمان این قلعه بکار رفته سنگ و ساروج می باشد و تمامی سطوح دیوارها و بدنه بیرونی حصار و برجها، بندکشی و درزگیری شده است.این قلعه دژ دفاعی محکمی در برابر حملات مهاجمین بوده و گنجایش هزاران سرباز را داشته. نقل است خواجه نصیر الدین طوسی مدتها در این قلعه زندگی کرده و کتاب اخلاق ناصری را به نام ناصرالدین محتشم فرمانروای قهستان درهمین محل انشا کرده است. قلعه کوه در اواخر قرن 5 هجری مرکز فرماندهی و هدایت دیگرقلاع قهستان بود.معماری قلعه با استفاده از ناهمواریهای کوه از دو بخش متمایز، یکی متعلق به سربازان و جنگجویان و دیگری قسمت امیرنشین فرماندهی ساخته شده است. استحکامات ایجاد شده در این قلعه شباهتی بسیار به قلعه آشیانه عقاب متعلق به اوایل دوره ساسانی در نزدیکی فیروزآباد دارد.
قلعه هاجرآباد :
قلعه هاجرآباد در 2 کیلومتری شرق قاین به صورت بنایی منفرد قرارگرفته است. قلعه هاجرآباد قلعه ای تدافعی بوده و به لحاظ پراکندگی بقایای سفالینه های بدست آمده در داخل و خارج آن می توان قدمت بنا را از قرن سوم و چهارم هجری تا دوره قاجاریه تخمین زد لیکن بر اساس مصالح بکاررفته، فرم و سبک معماری بنا،مشخصه هایی از معماری عصر صفویه قابل تشخیص است. پلان قلعه مربع شکل بوده که طول هر ضلع آن30متر می باشد. در چهار گوشه آن4 برج مدور وجود دارد که همه آنها خارج از قلعه واقع اند. ورودی کوتاهی به ارتفاع 90/2 متر در ضلع جنوب شرقی قلعه قرارگرفته و فضای درون قلعه به مرور ایام از بین رفته است. برجها در سه اشکوب ساخته شده که دو طبقه مسقف بوده و طبقه ای رو باز بوده که به منظوردیده بانی به کار می رفته است. پلان طبقه اول دایره شکل بوده و به جز ورودی روزنه ای نداشته است. در اشکوب دوم دو روزنه باریک بعنوان تیرکش و یک روزنه ی نورگیر تعبیه شده و از غلامگردشی به عرض 80 سانتی مترامکان دسترسی به این طبقه میسر می گردد. از درون اشکوب دوم بوسیله پلکانی به عرض 45 سانتی متر می توان به طبقه سوم رسید. بنابر آنچه از بقایای قلعه هاجرآباد باقیمانده می توان گفت که عمده مصالح به کار رفته در این بنا خشت و چینه است.(شماره ثبت آثارملی:4570 )
قلعه تاریخی سده :
قلعه تاریخی سده در غرب روستای سده در 45 کیلومتری جنوب شهر قاین واقع شده است.
با عنایت به فرم معماری قلعه می توان ساخت و ساز آن را به دوره تیموری نسبت داد. سفالینه هایی متعلق به قرون سوم و چهارم هجری تا عصر قاجاریه از محوطه درونی بنا و اطراف آن بدست آمده که بیانگر تداوم زندگی در آنجا می باشد. این بنا دارای پلانی شش ضلعی در اندازه های متفاوت است. 9 برج بلند پایداری لازم را به جرزهای بنا داده اند و نیازهای دیده بانی ونگهبانی را نیز بر آورده کرده اند. ورودی قلعه با دو برج در طرفین ساخته شده که درون برجها به ارتفاع حدود 150 سانتیمتر به شکل توپر بنا شده است.
روی این جرز مدور، سه طبقه بنا قرار گرفته که در هر طبقه روزنه هایی باریک جهت دیده بانی تعبیه گردیده است. دواشکوب ازاین برج مسقف بوده واشکوبه سوم روبازمی باشد. غلامگردشی به ارتفاع 5/5 متر دورادور دیوارهای داخلی قلعه را فرا گرفته که دسترسی به فضای داخلی برجها را میسر کرده که اکنون جز شواهدی مختصر چیزی از آن بر جای نمانده.ورودی قلعه در ضلع شرقی قرار گرفته و سنگی مدور به قطر 60/2 متر آن را مسدود می کرده است.ضخامت دیوارهای قلعه بین 20/1 تا 90/1 متر متغیر است و آثار خندقی در ضلع جنوبی و غربی آن به نظر می رسد.(شماره ثبت آثار ملی:5939 )
مساجد
مسجد جامع قاین :
مسجد جامع قاین تنها بنای به یادگار مانده از شهریست که ناصر خسرو در سال 444 هجری قمری از آن دیدن کرده است و درباره اش گفته: مسجد آدینه به شهرستان اندر و آنجا که مقصوره است طاقی بزرگ است چنانکه بزرگتر از آن در خراسان ندیدم و آن طاق نه در خور آن مسجد است و عمارت شهر همه گنبد است. آخرین سندی که در سنگ- لوح های این مسجد می توان یافت به تاریخ 796 هجری قمری اشاره دارد که از بازسازی مسجد توسط امیر جمشیدبن قارن از فرماندهان حکومت تیمور گورکانی حکایت می کند. لیکن در مورد تاریخ احداث شالوده اصلی مسجد عقاید متفاوتی ارائه شده. بعضی معتقدند بنای مسجد بر روی بقایای آتشکده ای پیش از اسلام ساخته شده و برخی بنا بر نوشته ناصر خسرو احداث آن را اوایل قرن پنجم ذکرکرده اند.عده ای نیز بر این باورند که شالوده این بنا در عصر تیموری پی ریخته شده . اما کاوش های انجام شده در لایه های زیرین مسجد، بقایای مسجدی از دوره سلجوقی را تایید کرده است.(شماره ثبت آثار ملی:295)
مسجد جامع افین :
عمارت مسجد افین در روستایی به همین نام در 85 کیلومتری شرق قاین قرار گرفته است. از عمده فضاهای معماری این بنا، ایوان،دو شبستان زمستانی، گنبدخانه و شبستانهای تابستانی طرفین ایوان است.
ظاهراً در گذشته طاق نماهایی در صحن مسجد وجود داشته که اکنون اثری از آن ها نیست. بنا به نظر کارشناسان احتمالاً شالوده و بنیان اولیه بنا در سده های سوم و چهارم هجری شکل گرفته ولی بنای کنونی ویژگیهای معماری دوره سلجوقی را داراست.(شماره ثبت آثار ملی:2182)
مسجد جامع خضری :
بنای مسجد جامع خضری در فاصله یک کیلومتری شهر جدید خضری قرار دارد. این فاصله می تواند بیانگر وقوع زلزله ای در سال 1347 باشد که کلیت شهر را ویران کرد. بنای اصلی مسجد خضری نیز پس از ویرانی با خود یاری مردم بازسازی شد و بنای فعلی بر روی بنای اصلی بنیان نهاده شده. با عنایت به شواهد تاریخی احتمالاً بنای مسجد مربوط به عصرصفوی بوده است.
این بنا دارای دو شبستان بوده که شبستان سمت شمالی آن ستون دار و پوشش آن طاق و چشمه بوده است. چشمه ها نیز باگنبدهای عرقچین پوشیده شده بودند. شبستان جنوبی نیز دارای سه دالان طویل بوده و هر دالان به وسیله دیواری از دالانهای دیگر جدا می شده. محراب اصلی مسجد در این قسمت قرار گرفته و نمای اصلی بنا آجر با بند کشی فتیله ای بوده است.( شماره ثبت آثار ملی:6653)
منازل قدیمی قاین
منزل میر(حقیقی):
بنای منزل میر (حقیقی) در بافت قدیمی شهر قاین واقع شده است. با توجه شواهد موجود از قبیل پیمون (فرم معماری بنا) تزئینات و مصالح، زمان معماری و ساخت بنا به دوره زندیه باز می گردد اما آثاری نیز از معماری سبک قاجاریه و پهلوی در آن مشاهده می شود. مساحت خانه حقیقی میر تقریباً 1560 متر است که به صورت دو ایوانی ساخته شده. پلان نامنظم دارد و ورودی اصلی خانه در ضلع شرقی قرار گرفته که شامل پیشخوان، هشتی و دالانهای ورودی است. این بنا دارای چهار صحن است که سه ورودی از داخل هشتی و صحن چهارم که شامل فضاهای اصطبل و انبار می باشد از راه مطبخ و ورودی کوچکی در ضلع شمالی بنا قابل دسترسی بوده است.
اندرونی بنا، شامل فضاهای مختلف نشیمن، ایوان زمستانی و تابستانی، مطبخ، فضاهای پشت ایوان و صحن می باشد و در ضلع جنوبی، بنا دارای ایوان، اتاق پشت ایوان، دو ایوانچه ی دو اشکوبه در دو سو و مطبخ می باشد که تقریباً ویران شده اند. در حال حاضر باغچه ای مستطیل شکل در مرکز حیاط وجود دارد. لیکن باغچه ها و حوض اندرونی از بین رفته و ویران شده اند. از منازل دیگر شهرستان قاین می توان به منزل قدیمی اقبالی و غفاری در روستای سده و منزل موسوی در بافت قدیمی شهر قاین اشاره کرد.( شماره ثبت آثار ملی:4804)
منزل قدیمی قارنی:
بنای منزل قارنی در بافت قدیمی شهر قاین واقع شده است. با در نظر گرفتن شواهد موجود ساخت بنا به دوره قاجاریه باز می گردد،این بنا دارای ایوان ورودی در ضلع شرقی می باشد که توسط یک هشتی دالان به حیاط منتقل می گردد. ایوان زمستانی در ضلع شرقی واقع شده و فضاهای ارتباطی در دو طرف ایوان، دو اشکوبه بوده و دسترسی به آن از طریق فضای ارتباطی ضلع شمالی ایوان امکان پذیر است. ایوان تابستانی در ضلع غربی بنا قرار دارد. بخش انتهای ایوان و فضاهای دو طرف ایوان دو اشکوبه است. در ضلع شمالی بنا چهار اتاق قرار دارد که دو اتاق آن به صورت تو در تو است. در ضلع جنوبی فضاهایی شامل انبار، دو فضای نشیمن و فضاهای جانبی دیگر قرار دارد. فضاهای اصطبل، حمام، مطبخ،انبار مواد غذایی و فضاهای مسکونی خدمه منزل در ضلع شرقی بنا واقع شده که متاسفانه تخریب گردیده است. اکثر فضاها دارای پوشش طاق و تویزه و عرقچین است. تزئینات بنا شامل رسمی بندی، گچبری از قبیل قوسهای کلیل گچبری شده، گل و بوته های اسلیمی وبخاری دیواری اتاقها و... می باشد.( شماره ثبت آثار ملی:3460)
درختان سالخورده و غارهای کهن
درختان کهنسال :
شهرستان قائنات درختان کهنسال بسیاری را درزمین بکر خویش جای داده . درختانی که یادآور عظمت و شکوه این خطه اند. تا کنون بیش از10 اصله درخت کهن با قدمتی بین 400 تا 500 سال در اطراف قاین شناسایی شده اند که از آن جمله می توان به سرو مهموئی، مولید، میر آباد و استند اشاره نمود.
غار خونیک :
غار خونیک در شمال شرق روستای خونیک بر ارتفاعات مشرف به روستا در 20 کیلومتری جنوب قاین قرار دارد. ابزار سنگی به دست آمده از این غار مربوط به دوران موسترین یا پارینه سنگی میانه است که تقریباً سی هزار سال قدمت دارند.آثار زندگی در غار خونیک از دوران پارینه سنگی تا عصر اسلامی باقی مانده. این آثار از طبقات زیرو رو شده غار در اثر زلزله به دست آمده که موید نظریه قدمت این غار می باشد. غار خونیک دارای دهانه ای در حدود 2 متر وفضای داخلی به طول5/1 و عرض 3 متر می باشد. دیواره های آن از سنگ های توروس تشکیل شده اند که به زیبا یی ویژه ای به محیط داخلی ان داده اند.اولین گمانه زنی های باستان شناسی در این غاربه سال 1949 میلادی توسط پروفسور کالتون استانلی کوون انجام شد. ابزار به دست آمده از غار خونیک عبارت بود از انواع تیغه های سنگی که به وسیله انسانهای عصر پارینه سنگی میانه تراشیده شده بودند و به ابزار یافت شده ی موسترین در فلات ایران شباهت کامل داشتند. (شماره ثبت آثار ملی:9592)
از دیگر غارهای جالب توجه منطقه قائنات می توان به غار جوجه، غار فارسان، ترشو،نوغاب و غار پهلوان اشاره کرد.
آرامگاهها و امامزاده ها
مقبره امام زاده زیدالنار :
زیدبن موسی از فرزندان امام موسی کاظم(ع) که بنای مقبره وی ملقب به امامزاده زید النار در روستای آفریز در 65 کیلومتری جنوب غربی شهرستان قاین واقع شده است. مصالح و پیمون بنا قدمت آن را به عصر صفویان مربوط می کند. لیکن کتیبه هایی در بنا موجود است که تاریخ ساخت آن را به قرون اولیه اسلامی منتسب می نماید.ورودی اصلی مجموعه، ایوانی در جبهه ی شمالی است که تزئینات بسیار زیبای مقرنس کاری و طاقی جناقی دارد. در دو سمت ایوان، داخل صحن، اتاق ها و غرفه هایی قرار دارند که در چهار ضلع امتداد می یابند و صحن مجموعه را محصور می کنند. پس از گذر از فضای صحن به عمارتی هشت ضلعی می رسیم که در بخش درونی به صورت صلیبی می باشد. فاصله این بنا از ایوان شمالی 16 متر است. ورودی اصلی مقبره در ضلع شمالی است که همانند ایوان ورودی دارای مقرنس کاری بسیار زیبایی است.
مقبره امام زاده زیدالنار گنبدی با شکوه و مرتفع دارد که دارای دو پوسته است.
فضای گنبد خانه پلانی صلیبی شکل دارد و فضای چهار ضلعی مرکزی با گوشه سازی های انجام شده به 8و16 ضلعی تبدیل شده که ساقه گنبد روی 16 ضلعی استوار گشته و تبدیل به دایره ای شده تا گنبد بر روی آن اسقرار یابد. فضای 4 ضلعی مرکزی گنبد خانه دارای رسمی بندی های زیبایی است و فضای داخلی آن با اندود گچ مزین گشته است.
گنبد نیز دارای تزئینات کاشیکاری با لعابی به رنگ فیروزه ای و نقشهای گل و بوته به رنگ سفید است که قسمتی از آن فروریخته و از بین رفته است. در کنار مقصوره گنبد خانه، سنگی خاکستری قرار دارد که مردم نسبت به آن باورهای ویژه ای دارند. کف سازی آجر در بخشهایی از صحن بنا دیده می شود و در حال حاضر، بنا دارای حوضی کوچک با دو باغچه است و درختی در آن که مردم به شاخ و برگش دخیل می بندند.
مقبره ابوذر جمهر قاینی :
در 5 کیلومتری جنوب قاین بر دامنه ی کوه ابوذر، مقبره ای قرار دارد که متعلق به یکی از عرفای نامدار، سیاستمداران و شاعران قرن چهارم و پنجم هجری قمری ست. مقبره ی ابوذر جمهر بر اساس شواهد، از بناهای ساخته شده در قرن 6و7 هجری قمری می باشد. این بنا به شکل چلیپایی و با معماری زیبایی ساخته شده. بقعه آن چهار ایوانی ست و گنبد بر فراز این ایوانها استوار شده .
طاق ایوانها ظاهراً به شکل کلیل اجرا شده اما جرز اصلی طاقها به صورت نیم بیضی باز کار شده، آنگاه با استفاده از پوشش کاذب به شکل کلیل در آمده. در تزیین داخلی بنا از گچ استفاده شده و نوع کاربندی پیشانی ایوانها به شکل طاق نماهای جناغی ست.
تزئینات گچکاری زیر گنبد یکی از زیباترین بخشهای بنا محسوب می شود که لچکی های 4 به8 آن دارای مقرنس ها و گچبری های خفیف و هنرمندانه است. در پشت بقعه، صفحه ای ایجاد شده که بناهای جنبی مقبره روی آن ساخته شده اند. در این میان، اتاقهای بسیار جالبی دیده می شود که یکی از آنها دارای گنبد زیبایی ست که با سنگ کار شده. مصالح اصلی بکاررفته در ساخت این مقبره سنگ، گچ و آجر می باشد وسخن آخر این که در کنار مقبره ابوذر جمهر قاینی درخت کهنسال بنه ای وجود دارد که حداقل700 سال از عمرش می گذرد . ( شماره ثبت آثار ملی:2759)
آرامگاه ابوالمفاخر :
ابومحمد حسن بن منصور از رجال معروف قرن ششم هجری است. وی عالم فقیه، محدث، ریاضی دان و اهل سیاست بود. ابومحمد در قاین به شغل قضاوت می پرداخت و چون شهرتش در سراسر ایران منتشر شد. بهرامشاه در سال 547 وی را به غزنین فرا خواند و به او سمت وزارت بخشید. وی 29 سال در این منصب باقی ماند.در ایام کهولت از وزارت کناره گرفت و روانه ی قاین شد و در همانجا فوت کرد.مقبره ی وی در فاصله ی یک کیلومتری از جنوب شهر قاین در جوار گورستانی قدیمی واقع شده است.
بنای آرامگاه پلانی 8 ضلعی در بخش خارجی دارد که مانع از رانش گنبد می شود. این بنای ایوانی ورودی در ضلع غربی دارد که از راه درگاه چوبی بر دیوار انتهایی اش می توان به فضای گنبد خانه راه یافت. پلان گنبد خانه مربع است که به وسیله ی گوشه سازی " فیلپوش" به هشت ضلعی تبدیل شده و نمای خارجی اش به شکل دایره و گریو " ساقه" گنبد به نظر می رسد. بر روی ساقه گنبد عرقچینی به سبک دو پوسته اجرا شده و در مرکز گنبد خانه قبر شیخ ابوالمفاخر قرار گرفته است. تزئینات داخلی بنا بسیار ساده است و شامل اندود گچ در کلیه سطوح، دیوارها، گنبد، طاقها و طاقنماها می باشد. به استناد پژوهشها و بررسیهای انجام شده این بنا در دوره قاجاریه ساخته شده و مشخصا ت معماری آن دوره را دارا می باشد. ( شماره ثبت آثار ملی:2377)
آب انبارها و رباطها
رباط زردان :
رباط زردان در جنوب روستای زردان در110 کیلومتری جنوب شرقی قاین قرار دارد. معماری کنونی بنا منسوب به دوره صفویه ست ولی بقایای سفالینه های متعلق به دوره های پیش از آنکه از درون دیوارها و منطقه ی اطراف رباط یافته شده است قدمت بنا را تا دوره سلجوقی تائید می کند. این بنا پلانی مربع شکل دارد که طول هر ضلع آن 5/27 متر می باشد. رباط زردان ایوانی مرتفع به بلندی تقریبی 8 متر دارد که طاق و پیشانی آن فروریخته. در دو سوی ایوان دو راهرو وجود دارد که طاقنماهایی در آنها ساخته شده و پوشش راه روها طهق وچشمه است. این راهروها نیز به دو راهرو در اضلاع شمال و جنوب بنا عمود شده اند. در ضلع شرقی بنا دیوار انتهایی رباط قرار دارد لیکن هیچ نشانه ای از ساخت و ساز راهرو، اصطبل و بارانداز در رباط به چشم نمی خورد. بر اساس شواهد در زمان قاجاریه ساخت و سازهایی در بنا انجام شده و شکل معماری رباط را به قلعه ی دفاعی بدل نموده که از آن جمله می توان به ساخت چهار برج در چهار گوشه خارجی رباط اشاره کرد. رباط زردان دارای ایوان ورودی زیبایی ست که پیشانی طاق آن با تزئینات آجری راسته و خفته آراسته شده. در این بنا گنبدها به صورت عرقچین کار شده و کلیه سطوح آجری و سنگی دیوارها بند کشی شده و نمای آجری ساده آن لطافت خاصی به بنا بخشیده است. (شماره ثبت آثار ملی:4456)
رباط چاهک :
بنای رباط چاهک در روستای چاهک موسویه از توابع بخش سده در 95 کیلومتری جنوب غربی قاین واقع شده است. این بنا دارای پلانی مربع شکل است که به صورت دو ایوانی و متقارن ساخته شده. بر اساس شواهد بدست آمده قدمت بنا به دوره ی صفویه باز می گردد. ( شماره ثبت آثار ملی:4458)
آب انبار خضری :
ساختمان آب انبار در فاصله ی یک کیلومتری شهر جدید خضری و در حد فاصل 56 کیلومتری شمال شهر قاین واقع شده. بر اساس شواهد تاریخی احتمالاً بنای آب انبار مربوط به دوره ی صفویه می باشد. سر در آب انبار ذر اثر زلزله سال 1347 به کلی ویران شده و سردر کنونی بر روی پایه های سردر قدیمی استوار گشته است. راه پله آب انبار 25 پله دارد که با مصالح آجر و ملات و ساروج ساخته شده. مخزن آن حدوداً 6 متر عمق دارد و قطرش بالغ بر 8 متر است. پوشش آن به شکل عرقچین و پلکانی است و نمایی از آجر رگ چین با بند کشی ساده به این بنا جذابیت و زیبایی بخشیده است. ( شماره ثبت آثار ملی:5940)
سازمان میراث فرهنگی خراسانجنوبی
شهرستان درمیان
شهر درمیان از لحاظ وجود آثار فرهنگی و تاریخی از غنی ترین شهر های جنوب خراسان جنوبی به شمار می رود. وجود تعداد زیادی تپه ها و محوطه های باستانی پراکنده در منطقه قلعه های اسماعیلی ، آسبادها ،مساجد و... نشان دهنده سابقه تمدنی با عظمت آن است روستای طبس مسینا و مناطق اطراف آن در فاصله حدود 30 کیلومتری شرق شهر درمیان ، از لحاظ تاریخی وباستان شناسی منطقه ای بسیار غنی می باشد.
مسجد جامع هندوالان
مسجد جامع هندوالان از بنا های دوره تیموری و از مهم ترین وبا شکوه ترین بنا های تاریخی درمیان می باشد.واز ویژگی های معماری آن می توان به سردر ورودی، گنبد،خانه صحن و شبستان ستون دار اشاره کرد. جالب ترین و مهم ترین بخش بنا گنبد خانه وگنبد آن است که با مهارت بر روی فضای چهار ضلعی قرار گرفته است شبستان ستون دار در دو طرف گنبد خانه قرار گرفته و سبک پوشش و روشنایی آن از ویژگی های ممتاز بنا است.
قلعه فورک
قلعه فورک در 10 کیلومتری جنوب شهر اسدیه واقع شده است این قلعه تاریخی از بنا های دوره افشاریه می باشد که در زمان نادر شاه به وسیله میرزا رفیع خان حاکم محل احداث گردید.فضاهای داخلی قلعه از شرق به غرب شامل سه قسمت تعدادی از آنها باقی مانده است. مصالح به کار رفته در ساخت قلعه بیشتر سنگ ، آجر وخشت می باشد.
آرامگاه سلطان ابراهیم رضا(ع)
بنای تاریخی آرامگاه سلطان ابراهیم رضا)ع(در روستای آبگرم گزیک قرار دارد. از مهمترین ویژگیهای معماری بنا ، طاقنماهایی در چهار طرف بنا همچنین، گنبد وگنبدخانه ودرب های آن می باشد.درب های چوبی بنا آثار ارزشمندی از هنر منبت را در خود دارند بر سطح دیوارهای گنبد خانه تا ارتفاع 5/1 متری آثار جالبی از هنر خوش نویسی دیده می شود. بعضی از این خطوط دارای تاریخ نگارش می باشند که تاریخ تعداد زیادی از آنان به دوران صفویه برمی گردد.
مسجد جامع درخش
بنای مسجد جامع درخش در داخل روستای درخش، شامل ایوانی رفیع ودو ایوانچه در دو طرف و یک صحن می باشد.ایوان این بنا اکنون دارای طاق هلالی است که به احتمال زیاد در گذشته این طاق جناقی بوده وپس از فرو ریختن به این سبک اجرا شده است دو ایوانچه دارای طاق جناقی می باشند عمده تزئینات بنا شامل رسمی بندی، وتزئینات چلیپایی می باشند.این بنا در سال 921 ﻫ. ق بنا شده است.
قلعه کل حسن صباح
این قلعه مهم ترین مرکز فدائیان اسماعیلی در منطقه کوهستان و اولین مرکز عمده اسماعیلیان در ایران به شمار می آید این قلعه که در منابع تاریخی از آن به نام قلعه مؤمن آباد یاد شده بر فراز کوهی مشرف به جلگه طبس مسینا واقع شده است وجود تعداد زیادی آجرهای منقوش پراکنده در سطح قلعه ، نشاندهنده ارجعیت این قلعه و حالت مرکزیت آن نسبت به سایر قلاع می باشد.
آسبادهای طبس مسینا
شرایط دشوار طبیعی مناطق کویری و بیابانی ایران باعث شده تا مردم کویر نشین از ابتکار وخلاقیت خود استفاده وبا حداکثر بهره گیری از عوامل و شرایط طبیعی، آن را در اختیار خود در آورند.آسباد های طبس مسینا از جمله این ابتکارات است. این آسباد های در بخش های مختلف بافت روستا به صورت ردیفی قرار دارند. تعداد آسباد هادر هر ردیف حدود 10عدد می باشد که به صورت شرقی غربی واقع شده اند. آسبادها از لحاظ معماری دارای دو طبقه می باشد طبقه فوقانی محل قرار گرفتن و چرخش پره ها و طبقه تحتانی محل ذخیره گندم و آرد نمودن گندم است
قلعه طبس مسینا
این بنای عظیم خشت و گلی قلعه ای است مدور وبه برج های متعدد وبزرگ که دورتادور آن را خندقی فرا گرفته است. قلعه تاریخی طبس با پلکان مدور دارای حدود 150 متر قطر می باشد در قسمت ورودی این قلعه برجی بزرگ به ارتفاعی حدود 11 متر و قطر 15 متر وجود دارد. در سطح خارجی این برج تعداد زیادی روزنه دیده بانی و تیرکش دیده می شود. این بنا از آثار دوران اسلامی به شمار می رود.
قلعه دختر نوغاب
از ویژگی های معماری این قلعه برجها،حصار،آب انبار، راهروهای ارتباطی، تالار ها و اطاق های متعدد می باشد.این بنا نیز مانند سایر قلعه ها یاسماعیلی به تبعیت از شکل و وضعیت توپوگرافی وشیب کوه بنا شده است.به گونه ای که بخش های مختلف آن در شیب کوه و بصورت پلکانی بنا شده است.این بنا از قلعه های دفاعی فدائیان اسماعیلی به شمار می رودو با توجه به نام قلعه شاید بقایایی از دوران ساسانی در خود داشته باشد.
قلعه های مسلمانان و کافران
برفراز قله های دو طرف کوههای واقع در مشرق روستای گسک دو قلعه عظیم در مقابل یکدیگر قد بر افراشته اند. این قلعه ها که یکی بنام قلعه مسلمانان و دیگری بنام قلعه کافران مشهور است از قلعه های عظیم سنگی دوران اسماعیلی و دوران قبل از اسلام به شمار می روند. قلعه مسلمانان دارای حصار، برج، آب انبار، اطاقها وراهروهای متعدد، مسیر ورود سواره نظام به داخل قلعه،کوره پخت آجر، و سد ذخیره آب می باشدو قلعه کافران دارای بخشهای کمتری می باشد. مهمترین بخش آن دروازه ورودی آن است که بقایای آن قابل مشاهده است.